UPESSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती कैंसिल, STF रिपोर्ट के बाद योगी सरकार का बड़ा फैसला

यूपीईएसएससी की तरफ से अप्रैल 2025 में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया था। हालांकि योगी सरकार ने परीक्षा को कैंसिल कर दिया है।

Update: 2026-01-07 15:38 GMT

लखनऊः उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने एक सरकारी भर्ती एग्जाम में बड़ा एक्शन लिया है। सरकार ने यूपीईएसएससी की तरफ से आयोजित कराई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया है। इसमें उत्तर प्रदेश की एसटीएफ को धांधली मिली है। पिछले साल अप्रैल महीने में आयोजित हुई परीक्षा में 1253 खाली पड़े पदों पर भर्ती की जाना थी।

दरअसल, यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग की एडेड डिग्री कॉलेजों की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती एग्जाम में बड़े लेवल पर गड़बड़ियों की जानकारी सामने आई है। इनवेस्टिगेशन में नकल माफिया की एक्टिव भागीदारी, फेक क्वेश्चनपेपर और रिक्रूटमेंट प्रोसेस में गंभीर अनियमितता पाए जाने के बाद पूरे एग्जाम को ही कैंसिल कर दिया गया है।

योगी सरकार ने क्यों लिया फैसला

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैंडिडेट्स के भविष्य और सिलेक्शन प्रोसेस की विश्वसनीयता को प्राथमिकता देते हुए इस एग्जाम को कैंसिल करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही फिर से परीक्षा को जल्दी कराने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि अभ्यर्थियों के हित में परीक्षा कैंसिल की गई है।

एसटीएफ की जांच के बाद की गई कार्रवाई

बता दें कि एग्जाम को कैंसिल करने की कार्रवाई एसटीएफ की सीक्रेट जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। इस जांच में परीक्षा में गड़बड़ी के सबूत मिले हैं। एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी महबूब अली, आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कीर्ति पांडेय का गोपनीय सहायक था। इसी ने सिलेक्शन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल कर दिए। इसी वजह से जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आयोग अध्यक्ष से रिजाइन ले लिया गया था।

यूपीईएसएससी की एफिलिएडेट डिग्री कॉलेज में 910 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए 16 और 17 अप्रैल को लिखित परीक्षा आयोजित कराई गई थी। इसमें करीब 82 हजार कैंडिडेट्स ने भाग लिया था।

एग्जाम के बाद ही मिली खामियां

भर्ती की लिखित परीक्षा होने के बाद ही बड़े पैमाने पर नकल, पेपर लीक और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आने लगी थीं। इसके बाद सीएम के निर्देश पर एसटीएफ की जांच शुरू की गई और 20 अप्रैल को फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर कैंडिडेट्स से ठगी करने वाले गैंग के तीन सदस्य, महबूब अली, बैजनाथा पाल और विनय पाल को अरेस्ट किया गया।

पूछताछ में कबूला पेपर देने का सच

जब एसटीएफ ने पूछताछ की तो महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने माडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र हासिल किए। फिर पैसे लेकर अभ्यर्थियों को क्वेश्चन पेपर उपलब्ध कराए। एसटीएफ की गहन विवेचना, मोबाइल डेटा एनालिसिस और डाटा मिलान से इस खुलासे की पुष्टि हुई। जांच में अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आए।

छात्रों के विरोध के बाद रद्द की एग्जाम

परीक्षा के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट और एसटीएफ की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने रिजल्ट और इंटरव्यू की प्रोसेस को भी रोक दिया। इसके साथ ही अभ्यर्थियों के आयोग के बाहर धरना-प्रदर्शन करते हुए एग्जाम कैंसिल करने की मांग की। कैंडिडेट्स के बढ़ते विरोध के चलते आखिरकार परीक्षा निरस्त करने का फैसला लिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार सभी भर्तियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आयोग को निर्देश दिए हैं कि नई परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ जल्द कराई जाए।

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