साहब...हमको मरे 12 साल हो गए अब तो जिंदा कर दो, जनसुनवाई का अजीब मामला

उमरिया में 80 वर्षीय बैगा आदिवासी को 12 साल पहले कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। वह खुद को जिंदा साबित करने की गुहार लगा रहा है।

Update: 2026-01-13 16:22 GMT

उमरियाः 'साहब… हमको मरे 12 साल हो गए, अब तो जिंदा कर दो, ताकि हमारा गुजारा हो सके।' यह लिखी गई कुछ लाइनें नहीं है, बल्कि उमरिया जिले के एक बुजुर्ग बैगा आदिवासी की हकीकत है। 80 वर्षीय बुजुर्ग को पिछले 12 वर्षों से कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है। वह अब जीवन के अंतिम पड़ाव में खुद को फिर से ‘जिंदा’ साबित करने की गुहार लगा रहा है।

दरअसल, जिले के करकेली जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सहजनारा से भ्रष्टाचार और लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां के निवासी घमीरा बैगा को पंचायत रिकॉर्ड में 12 साल पहले मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद से वह न पेंशन पा रहे हैं, न राशन और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ मिल रहा है।

लाभार्थी ही कागजों में मृत

बैगा जनजाति देश की संरक्षित और विलुप्तप्राय जनजातियों में शामिल है। केंद्र और राज्य सरकारें इनके लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं चला रही हैं, लेकिन उमरिया में सिस्टम ने योजनाओं से पहले ही लाभार्थी को ‘मार’ दिया। घमीरा बैगा ने बताया कि वह सैकड़ों बार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं। हर मंगलवार की जनसुनवाई में आवेदन लेकर पहुंचते हैं, लेकिन नतीजा शून्य ही रहता है। उन्होंने कहा, 'मुझे न पेंशन मिलती है, न कोटा से अनाज। मैं रिकॉर्ड में मर चुका हूं। आज आखिरी बार विनती करने आया हूं।'

सिस्टम की बेरुखी पर भाई का सहारा

80 वर्षीय घमीरा बैगा के साथ उनका 75 वर्षीय छोटा भाई भी जनसुनवाई में पहुंचा। उसने बताया कि बड़े भाई को रिकॉर्ड में मृत दिखा दिया गया है। छोटे भाई ने बताया कि मैं अपने भाई को लेकर हर जगह दौड़ा हूं। पंचायत में कोई नहीं सुनता। मेरा नीला कार्ड बना दिया गया है, जिसमें सिर्फ 5 किलो अनाज मिलता है, जबकि नियम से 35 किलो मिलना चाहिए। कोटेदार कहता है पंचायत से ठीक करवाओ, पंचायत वाले सुनते नहीं हैं।

प्रशासन ने कार्रवाई का भरोसा

इस मामले में जिला पंचायत के सीईओ अभय सिंह ओहरिया ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने दावा किया कि जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि जांच के बाद घमीरा बैगा को पात्रता अनुसार पेंशन, राशन और अन्य योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।

सवालों के घेरे में पंचायत व्यवस्था

गौरतलब है कि उमरिया जिले में यह पहला मामला नहीं है। कहीं जीवित व्यक्ति को मृत बताया जा रहा है, तो कहीं मृत व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। हर मंगलवार की जनसुनवाई में ऐसे मामले सामने आते हैं, लेकिन प्रशासनिक सिस्टम की नींद अब तक नहीं टूट रही।

Tags:    

Similar News