नकली शराब परिवहन परमिट:सोम डिस्टलरीज की दोनों लाइसेंस सस्पेंड

Update: 2026-02-05 04:59 GMT

नकली शराब परिवहन परमिटों एवं अवैध शराब परिवहन के मामले में आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की चर्चित आसवनी मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड, सेहतगंज, जिला रायसेन के डी-1, एफएल-1, सीएस-1 एवं सीएस-1बी तथा मेसर्स सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड, रोजराचक, जिला रायसेन के एफएल-9, एफएल-9-ए एवं ओएफबी-3 लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

नकली परमिट, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर ने कंपनी सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी दोषी माना था। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि आरोपियों ने मिलकर शराब परिवहन के लिए कूटरचित परमिट और बिल्टी तैयार की तथा फर्जी परमिटों को असली बताकर उपयोग किया। इससे शासन को राजस्व की हानि हुई और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

न्यायालय ने मेसर्स सोम डिस्टलरीज समूह के प्रतिनिधियों, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और निदेशकों सहित कई आरोपियों को कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया था। हालांकि उच्च न्यायालय, इंदौर ने सत्र न्यायालय द्वारा दी गई सजा पर रोक लगा दी थी, लेकिन लाइसेंस पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी।

कानूनी अभिमत के बाद हुई कार्रवाई

प्रकरण में पारित आदेशों के तहत यह प्रश्न सामने आया कि आरोपियों द्वारा उच्च न्यायालय, इंदौर के समक्ष प्रस्तुत दो प्रकरणों में दोनों इकाइयों के पक्ष में स्वीकृत लाइसेंस के निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है या नहीं। इस संबंध में आबकारी आयुक्त ने पहले अतिरिक्त महाधिवक्ता, ग्वालियर को पत्र लिखकर अभिमत मांगा, लेकिन अभिमत प्राप्त नहीं हो सका। इसके बाद 25 जुलाई 2024 को अतिरिक्त महाधिवक्ता, उच्च न्यायालय जबलपुर को पत्र लिखकर अभिमत मांगा गया। इसके पश्चात तीन और पत्र भेजे गए।

अंततः 24 दिसंबर 2025 को महाधिवक्ता, उच्च न्यायालय जबलपुर से अभिमत प्राप्त हुआ, जिसमें सोम की दोनों इकाइयों पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई किए जाने के पक्ष में राय दी गई। महाधिवक्ता के अभिमत तथा इकाइयों द्वारा प्रस्तुत जवाब पर विचार करने और उच्च न्यायालय द्वारा पारित दो आदेशों की अद्यतन स्थिति का अवलोकन करने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उच्च न्यायालय ने केवल सजा पर रोक लगाई है, लाइसेंस पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है। इसके बाद आबकारी आयुक्त ने दोनों इकाइयों के सभी लाइसेंस निलंबित कर दिए।

विभागीय अमले पर भी हो चुकी है सख्त कार्रवाई

नकली शराब परिवहन परमिटों एवं अवैध शराब परिवहन के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, देपालपुर के निर्णय दिनांक 23 दिसंबर 2023 के बाद दोषी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई है।

इनमें आबकारी उप निरीक्षक प्रीति गायकवाड़ को 25 सितंबर 2025 को सेवा से पदच्युत किया जा चुका है। जबकि सेवानिवृत्त हो चुके अन्य अधिकारियों मदन सिंह पवार, सहायक जिला आबकारी अधिकारी, कैलाश चंद्र बंगाली, जिला आबकारी अधिकारी तथा रामप्रसाद मिश्रा, आबकारी उप निरीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है।

आरोपियों ने इस तरह की थी गड़बड़ी

आरोपियों ने मिलकर परमिट क्रमांक 10363, ट्रक क्रमांक एमपी-09-एचएफ-5185 की बिल्टी और अनेक परमिट बुक कूटरचित करने का अवैध कार्य किया। अवैध साधनों से इस कार्य को अंजाम देने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा गया और कूटरचित परमिटों के माध्यम से छल किया गया।

कूटरचित दस्तावेजों को असली के रूप में उपयोग किया गया, जिसमें आरोपी मदन सिंह द्वारा 5 फर्जी परमिट बुक, वीरेंद्र भारद्वाज द्वारा 272, रामप्रसाद मिश्रा द्वारा 25, प्रीति गायकवाड़ द्वारा 279, संजय गोहे द्वारा 282, कैलाश बंगाली द्वारा 29, मोहन सिंह तोमर द्वारा 676, उमाशंकर द्वारा 75 तथा दिनकर सिंह द्वारा 65 फर्जी परमिट तैयार किए गए।

आरोपियों ने शासन को नुकसान पहुंचाने और मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह कूटरचना की। इन फर्जी परमिटों और बिल्टियों के माध्यम से मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड, रोजराचक से दीव तक शराब का परिवहन किया गया।

Similar News