मैहर में सिस्टम की बड़ी चूक, जीवित शिक्षक को पोर्टल पर मृत घोषित,ड्यूटी जाकर भी अबसेंट
मैहर में ‘हमारे शिक्षक’ एप की बड़ी चूक सामने आई है। जीवित शिक्षक को पोर्टल पर मृत दिखाया गया। ड्यूटी जाने के बाद भी शिक्षक को अबसेंट दिखा रहा सिस्टम।
मैहर। मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूल के शिक्षकों की उपस्थिति अब ‘हमारे शिक्षक’ एप के जरिए दर्ज की जा रही है। लेकिन यह व्यवस्था अब सवालों के घेरे में आ गई है। मैहर जिले के रामनगर संकुल अंतर्गत मनकहरी हाईस्कूल में पदस्थ एक शिक्षक को पोर्टल पर मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे जीवित हैं और नियमित रूप से स्कूल जाकर पढ़ा भी रहे हैं। इस गंभीर चूक की जानकारी सामने आते ही मैहर से लेकर भोपाल तक हड़कंप मच गया।
मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी गड़बड़ी सुधारने में जुटे जरूर हैं, लेकिन पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी संबंधित शिक्षक को राहत नहीं मिल सकी है।
लॉगिन करते ही दिखा अकाउंट इनएक्टिव
जानकारी के अनुसार, दामोदर प्रसाद साकेत मनकहरी हाईस्कूल में प्राथमिक शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं। शासन के निर्देश पर 21 जनवरी 2026 से ‘हमारे शिक्षक’ एप के जरिए उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया गया था। जब दामोदर प्रसाद ने अपनी आईडी से लॉगिन करने की कोशिश की तो उनका अकाउंट निष्क्रिय दिखने लगा।
संकुल प्राचार्य की गलती से पोर्टल में 'डेड'
इस पर उन्होंने तुरंत संकुल और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से संपर्क किया। जांच के दौरान सामने आया कि संकुल प्राचार्य की आईडी से ही गलती से उन्हें पोर्टल में ‘डेड’ दर्ज कर दिया गया था, जिससे उनका अकाउंट अपने आप निष्क्रिय हो गया।
भोपाल तक पहुंचा मामला
यह गड़बड़ी प्रशासनिक स्तर पर हुई होने के चलते संकुल प्राचार्य से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी और डीपीआई भोपाल तक सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई। संकुल ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए डीईओ को पत्र भी लिखा, लेकिन अब तक पोर्टल में सुधार नहीं हो सका है।
14 दिन से पढ़ा रहे, फिर भी पोर्टल में अनुपस्थित
सबसे हैरानी की बात यह है कि बीते चौदह दिनों से दामोदर प्रसाद साकेत नियमित रूप से स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन पोर्टल में उनकी उपस्थिति अनुपस्थित ही दर्ज हो रही है। ऐसे में अब उनके वेतन और उपस्थिति आधारित परितोषिक को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सिस्टम पर उठे सवाल
हालांकि यह मामला एक शिक्षक से जुड़ा है, लेकिन जिस डिजिटल सिस्टम को जीरो एरर और सख्त निगरानी की कसौटी पर लागू किया गया है, उसमें इस तरह की चूक ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर गलती को कब तक सुधार पाता है और पीड़ित शिक्षक को कब राहत मिलती है।