भोजशाला विवाद फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, वसंत पंचमी पर नमाज रोकने की मांग

Update: 2026-01-19 04:31 GMT

धार की भोजशाला को लेकर चला आ रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। इस बार वजह है 23 जनवरी को पड़ रही वसंत पंचमी, जो संयोग से शुक्रवार के दिन है। इसी को लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर उस दिन जुमे की नमाज पर रोक और सरस्वती पूजा की अनुमति देने की मांग की है.याचिका में कहा गया है कि स्थिति को लेकर अब तक स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं, जिससे टकराव की आशंका बनी हुई है।

वसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन

भोजशाला परिसर में हर शुक्रवार मुस्लिम समुदाय की जुमे की नमाज होती है, जबकि वसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष सरस्वती पूजा करता है। इस साल दोनों एक ही दिन पड़ने से विवाद गहरा गया है.हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि 23 जनवरी को भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज पर रोक लगाई जाए और केवल हिंदू समाज को सरस्वती पूजा की अनुमति दी जाए।

ASI के 2003 के आदेश पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी यानी देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसका निर्माण 11वीं सदी में परमार राजाओं के समय हुआ था। ऐतिहासिक रूप से यहां हिंदू पूजा-अर्चना करते रहे हैं।

याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश का हवाला दिया गया है। इस आदेश के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार और वसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति दी गई थी, जबकि मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज पढ़ने की छूट दी गई.हालांकि याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि ASI का यह आदेश उस स्थिति पर पूरी तरह मौन है, जब वसंत पंचमी शुक्रवार के दिन ही पड़ जाए।

सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की भी मांग

हिंदू पक्ष ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि वसंत पंचमी के दिन ASI और राज्य सरकार की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो.याचिका में कहा गया है कि संवेदनशीलता को देखते हुए पहले से स्पष्ट आदेश बेहद जरूरी हैं।

जल्द सुनवाई की अपील

समय की कमी का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया है। हिंदू पक्ष का कहना है कि वसंत पंचमी नजदीक है और यदि समय रहते फैसला नहीं हुआ, तो हालात बिगड़ सकते हैं.अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या कोई अंतरिम आदेश जारी होता है।

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