सबसे स्वच्छ इंदौर में 243 फैक्ट्रियां फैला रहीं जहर, अब कटेगी बिजली

Update: 2026-01-22 05:29 GMT

हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रदूषण बोर्ड ने दिखाई सख्ती

स्वच्छता के तमगे के पीछे छिपे जल और वायु प्रदूषण के काले सच पर आखिरकार हाईकोर्ट की नजर पड़ गई। इंदौर में बिना अनुमति चल रहे और खुलेआम प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई सामने आई है।

हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इंदौर जिले के 243 उद्योगों को नोटिस थमाए हैं। इनमें कई ऐसे उद्योग शामिल हैं, जो न तो लाइसेंसधारी हैं और न ही प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन कर रहे हैं। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि बिजली कनेक्शन काटकर उद्योगों को बंद कराया जाएगा।

खतरनाक स्तर पर हवा की गुणवत्ता

जहां एक ओर इंदौर का पानी दूषित पाया जा चुका है, वहीं दूसरी ओर हवा की गुणवत्ता लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रही है। हाईकोर्ट ने माना है कि यह स्थिति मध्यप्रदेश जल प्रदूषण निवारण और वायु प्रदूषण निवारण अधिनियमों का खुला उल्लंघन है। जिले में खनन, स्टोन क्रशर और रेड-रिंज श्रेणी के उद्योग सबसे बड़े प्रदूषणकर्ता बनकर उभरे हैं। इन उद्योगों के कारण न सिर्फ पर्यावरण खतरे में है, बल्कि निवासियों की स्वास्थ्य पर भी सीधा असर पड़ रहा है।

बिजली कंपनी को सौंपी उद्योगों की सूची

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंदौर रोजनल ऑफिसर सतीश चौकसे ने स्वीकार किया कि 243 उद्योगों को नोटिस दिए गए हैं। कई उद्योग बिना अनुमति संचालित हो रहे हैं। ऐसे उद्योगों की सूची बिजली कंपनी को सौंप दी गई है ताकि सीधे बिजली काटी जा सके। हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर जिले में 5,961 उद्योग पंजीकृत हैं, जिनमें से 1,000 से ज्यादा उद्योग प्रदूषण विभाग की बिना अनुमति चलते पाए गए। कई उद्योग सालों से नियमों की अवहेलना करते रहे, जबकि प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा।

अगली सुनवाई नौ फरवरी को

इस मामले में 9 फरवरी को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई होगी। महाधिवक्ता प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर जवाब पेश करेंगे। साफ है कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो और बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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