भोपाल के जेपी अस्पताल में एक बार फिर से दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ खड़ा हुआ है. पहले फफूंद मिलने की शिकायत अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब एक सीलबंद माउथ वॉश की बोतल के अंदर कीड़ा पाया गया है। इस घटना ने मरीजों के बीच भय और अस्पताल प्रशासन के सामने जवाबदेही की मांग को मजबूती से खड़ा कर दिया है.
मामला तब सामने आया जब गले में दर्द की शिकायत लेकर आए एक मरीज ने अस्पताल के मेडिकल स्टोर से माउथ वॉश ली। जैसे ही उसने बोतल खोली, अंदर कीड़ा तैरता हुआ और गंदगी साफ नजर आई. यह देख मरीज सकते में आ गया और उसने तुरंत इसकी सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा को दी.
यूथ कांग्रेस ने जताया विरोध
जेपी अस्पताल में लगातार घटिया दवाओं को लेकर यूथ कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस के नेता आशुतोष चौकसे और उमंग सिंधार ने कहा कि अस्पताल में इस तरह की लापरवाही गरीब और असहाय मरीजों के लिए खतरनाक है। यदि दवाएं ही दूषित होंगी तो बीमारी बढ़ने की संभावना अधिक होगी। उनका यह भी कहना था कि मरीजों के भरोसे को झटका पहुंचाने वाली ऐसी घटनाएं तुरंत खत्म होनी चाहिए।
प्रारंभिक जांच में सामने आई लापरवाही
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि अस्पताल के स्टोर रूम में नमी और साफ-सफाई की कमी के कारण दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसी वजह से दवाओं में फफूंद और कीड़ों के मिलने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
जांच समिति का गठन
इस गंभीर मामले को देखते हुए सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अस्पताल में दवाओं के भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भी विशेष निगरानी समिति बनाई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।