अरिजीत सिंह समेत भारतीय गायकों ने पश्चिमी दुनिया को दी कड़ी चुनौती
चार्टमेट्रिक रिपोर्ट 2025 के अनुसार अरिजीत सिंह समेत भारतीय कलाकारों ने वैश्विक संगीत ट्रेंड बदले और पश्चिमी वर्चस्व को चुनौती दी।
दुनिया के संगीत इतिहास में वर्ष 2025 को भारत के लिए एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। चार्टमेट्रिक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कलाकारों और भारतीय संगीत शैलियों ने पश्चिमी दुनिया के वर्चस्व को सीधी चुनौती दी है। इस बदलाव का सबसे बड़ा चेहरा लोकप्रिय गायक अरिजीत सिंह बने हैं, जिन्होंने भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई।
रिपोर्ट के मुताबिक अरिजीत सिंह और उनके जैसे कई भारतीय गायकों ने न सिर्फ स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड बनाए, बल्कि भारतीय संगीत को वैश्विक संस्कृति का अहम हिस्सा भी बना दिया। गीत ‘सफर’ और ‘कुछ तो है तुझसे राब्ता’ जैसे गानों ने दुनियाभर में लोकप्रियता हासिल की और भारतीय संगीत की भावनात्मक गहराई को अंतरराष्ट्रीय श्रोताओं तक पहुंचाया।
चार्टमेट्रिक रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2025 में टेलर स्विफ्ट दुनिया की सबसे लोकप्रिय कलाकार रहीं, लेकिन भारतीय कलाकारों की भागीदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत दिखाई दी। जहां पहले भारतीय संगीत की पहुंच अमेरिका और यूरोप तक सीमित मानी जाती थी, वहीं अब कोरिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय संगीत को बड़ी स्वीकार्यता मिल रही है।
रिपोर्ट बताती है कि ‘अन्य’ श्रेणी के अंतर्गत शामिल क्षेत्रीय संगीत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। इसमें बॉलीवुड, कोरियाई पॉप, लैटिन अमेरिकी संगीत, अफ्रोबीट्स और इंडोनेशियन फोक जैसी शैलियां शामिल हैं। वर्ष 2020 में जहां इन शैलियों की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
चार्टमेट्रिक के अनुसार भारत अब केवल वैश्विक संगीत का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण निर्माता भी बन चुका है। भारतीय कलाकारों की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता और संगीत की विविधता यह संकेत देती है कि आने वाले समय में वैश्विक संगीत परिदृश्य और अधिक बहुध्रुवीय होगा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2025 में श्रोताओं की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लोग केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े संगीत को प्राथमिकता दे रहे हैं। भाषा और शैली की सीमाएं टूट रही हैं और गैर-अंग्रेज़ी संगीत को पहले से कहीं अधिक स्वीकार किया जा रहा है। चार्टमेट्रिक की यह रिपोर्ट संकेत देती है कि वैश्विक संगीत अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां भारतीय संगीत और कलाकारों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।