चारधाम यात्रा की हुई शुरुआत, पहले दिन 550 यात्री पहुंचे केदारनाथ

Update: 2021-09-18 12:51 GMT

देहरादून। देश सरकार ने आज से चारधाम यात्रा शुरू कर दी गई है। केदारनाथ धाम में पहले दिन करीब साढ़े पांच सौ तीर्थयात्री पहुंचे। यात्रा खुलने से केदारघाटी के लोगों में खासा उत्साह बना हुआ है। यात्रा पड़ावों पर तीर्थ यात्रियों की चहल-कदमी से वीरान पड़े बाजार में रौनक लौट आई है। यात्रा शुरू होने से घोड़ा-खच्चर मजदूर, वाहन चालक, ढाबा, होटल, लॉज व्यापारियों में खुशी है। 

लम्बे समय से श्रद्धालु यात्रा खुलने का इंतजार कर रहे थे। आज से चारधामों में यात्रा शुरू हो गई है। अब देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालु धामों में आकर पुण्य अर्जित कर सकतें हैं। रुद्रप्रयाग जिले में ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध केदारनाथ धाम, द्वितीय केदार मदमहेश्वर एवं तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ का मंदिर हैं, जहां ग्रीष्मकाल की यात्रा के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन दो साल से कोरोना महामारी के चलते यात्रा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। ऐसे में केदारघाटी, तुंगनाथ व मदमहेश्वर घाटी के लोगों की आजीविका पर बुरा असर देखने को मिला है। पिछले वर्ष भी कोरोना महामारी के कारण यात्रा को तीन माह बाद खोला गया था, जिसके बाद श्रद्धालुओं को धाम आने की अनुमति मिली थी। उस दौरान कम संख्या में यात्रियों के आने से लोगों का रोजगार सही तरीके से नहीं चल सका था और उन्हें उम्मीद थी कि वर्ष 2021 की यात्रा में उन्हें सुखद महसूस होगा, मगर इस वर्ष भी कोरोना महामारी के चलते यात्रा को पूर्ण रूप से बंद किया गया और हाई कोर्ट ने भी कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए यात्रा पर रोक लगा दी। ऐसे में लोगों का रोजगार ठप पड़ा गया और कोरोना के मामले कम होने पर चारधाम यात्रा खोलने की मांग की गई।

यात्रा के पड़ाव पर लौटी रौनक - 

साढ़े चार माह बाद चारधाम यात्रा शुरू हुई है। ऐसे में यात्रा पड़ावों पर व्यवसाय कर अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है। केदारघाटी के 80 प्रतिशत लोगों की रोजी-रोटी चारधाम यात्रा पर ही टिकी हुई है। छह माह यात्रा में काम करने के बाद यहां के लोग सालभर का गुजारा करते हैं। यात्रा खुलने से वाहन चालक, डंडी-कंडी, घोड़ा-खच्चर, ढाबा, होटल व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। उन्हें उम्मीद है कि डेढ़ महीने की यात्रा से उन्हें अच्छा रोजगार मिलेगा और वे अपने परिवार का लालन-पालन कर सकेंगे।


Tags:    

Similar News