भारत में पहली बार एक ऐसा वैश्विक स्तर का इंडेक्स लॉन्च किया गया है, जो किसी देश की प्रगति को केवल जीडीपी या आर्थिक आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी जवाबदेही, नैतिक शासन, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और नागरिकों की भलाई के आधार पर मापेगा। इसका नाम ‘जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक (रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स–आरएनआई)’ है, जिसे देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की उपस्थिति में लॉन्च किया गया।
इस इंडेक्स के लिए आईआईएम मुंबई, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (डीएआईसी) ने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (डब्ल्यूआईएफ) के साथ मिलकर काम करने की घोषणा की है। इसका मकसद देशों की जिम्मेदारी, नैतिक शासन और दीर्घकालिक सोच को सामने लाना है। यह साझेदारी वैश्विक स्तर पर जिम्मेदार राष्ट्रों के मूल्यांकन की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
154 देशों का आकलन करेगा नेशंस इंडेक्स
इस पहल के जरिए यह बताया गया कि आज के जटिल वैश्विक माहौल में किसी देश की मजबूती केवल उसकी आर्थिक ताकत से नहीं, बल्कि उसकी जवाबदेही, दीर्घकालिक सोच, नैतिक मूल्यों और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता से तय होती है। साथ ही, देशों के बीच आपसी सीख और सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स में दुनिया के 154 देशों का आकलन किया जाएगा। यह आकलन पारंपरिक आर्थिक आंकड़ों से अलग और अधिक पारदर्शी तरीके से किया जाएगा, जिससे बेहतर नीतियां बनाने, देशों के बीच सकारात्मक संवाद और नागरिकों की जीवन गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सके।
इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि यह इंडेक्स केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह समझने का माध्यम है कि कोई देश अपने नागरिकों और मानवता के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नैतिकता का विचार भारतीय संस्कृति में पहले से ही गहराई से जुड़ा हुआ है।