मद्रास HC की सख्त टिप्पणी: सनातन पर उदयनिधि का बयान हेट स्पीच, कहा- ऐसी बातें नरसंहार जैसी

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि सनातन धर्म पर उदयनिधि स्टालिन का बयान हेट स्पीच की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणियां कीं

Update: 2026-01-21 08:40 GMT

मद्रास। तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की बातें हेट स्पीच के दायरे में आती हैं और यह केवल आलोचना नहीं बल्कि एक पूरे समुदाय के अस्तित्व पर सवाल उठाने जैसा है। यह टिप्पणी उदयनिधि के उस बयान के संदर्भ में आई है, जो उन्होंने सितंबर 2023 में दिया था और जिसे लेकर देशभर में भारी विवाद हुआ था।

क्या था पूरा मामला

2 सितंबर 2023 को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से करते हुए कहा था कि “इनका सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि इन्हें खत्म करना जरूरी है।” इस बयान का वीडियो बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसके बाद राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया। हैरानी की बात यह रही कि इस पूरे विवाद में उदयनिधि के बयान पर कोई केस दर्ज नहीं हुआ, बल्कि उनकी बातों को शेयर करने वाले अमित मालवीय के खिलाफ DMK नेता की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई। आरोप था कि मालवीय ने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। मालवीय ने इस FIR को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में चुनौती दी थी।

तीन साल बाद हाईकोर्ट का फैसला

बुधवार को जस्टिस एस. श्रीमथी ने FIR को रद्द करते हुए कहा कि मालवीय ने केवल एक सार्वजनिक बयान पर प्रतिक्रिया दी थी। ऐसी प्रतिक्रिया पर आपराधिक केस चलाना, कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। कोर्ट के 4 अहम कमेंट

1. हेट स्पीच देने वाले पर केस नहीं

कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हेट स्पीच देने वाला बच जाता है, जबकि उस पर सवाल उठाने वाले को कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं।

2. सवाल उठाना अपराध नहीं

आज की स्थिति में हेट स्पीच शुरू करने वाले सुरक्षित हैं और प्रतिक्रिया देने वालों पर FIR दर्ज हो रही है, यह बेहद चिंताजनक है।

3. “खत्म कर दो” कहना सिर्फ विरोध नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि सनातन को खत्म करने जैसे शब्द सिर्फ वैचारिक असहमति नहीं दर्शाते, बल्कि उसे मानने वाले करोड़ों लोगों के अस्तित्व पर सीधा हमला हैं।

4. नरसंहार जैसे संकेत

कोर्ट ने तमिल शब्द “Sanathana Ozhippu” का जिक्र करते हुए कहा कि इसका अर्थ केवल विरोध नहीं, बल्कि पूरी तरह मिटाना है, जो सांस्कृतिक नरसंहार की सोच को दर्शाता है।

विवाद के बाद उदयनिधि की सफाई

विवाद बढ़ने पर उदयनिधि स्टालिन ने सफाई दी थी कि वह हिंदू धर्म नहीं, बल्कि सनातन प्रथाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु में पिछले 100 सालों से सनातन के खिलाफ आवाज उठती रही है और DMK आगे भी ऐसा करती रहेगी। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि सनातन के विरोध की वजह से ही समाज में सुधार हुए, महिलाएं आगे बढ़ीं और सती जैसी कुप्रथाएं खत्म हुईं। उनके मुताबिक, DMK की स्थापना ही सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष के लिए हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट भी जता चुका नाराजगी

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी पहले उदयनिधि स्टालिन को फटकार लगा चुका है। 4 मार्च 2024 को शीर्ष अदालत ने कहा था कि उदयनिधि कोई आम व्यक्ति नहीं हैं। संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को बयान देते समय उसके नतीजों के बारे में सोचना चाहिए था। कोर्ट ने इसे अधिकारों का गलत इस्तेमाल बताया था। फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर सनातन विवाद चर्चा के केंद्र में है, और सवाल यही है, क्या हेट स्पीच की सीमा तय करने में कानून अब और सख्ती दिखाएगा।

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