जंगल सुरक्षित, वन्यजीव असुरक्षित: बाध शिकार और तस्करी के आंकड़े कर रहे व्यवस्था पर वार
25 साल में 348 शेड्यूल्ड वन प्राणियों की मौत, 250 हाथी काल के गाल में
छत्तीसगढ़ को देश के उन राज्यों में गिना जाता है, जहां आज भी बड़े पैमाने पर जंगल बचे हुए हैं। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, राज्य का करीब 44 फीसदी भू-भाग वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। कागजों में यह उपलब्धि बड़ी दिखती है, लेकिन जब इन्हीं जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों के आंकड़े सामने आते हैं, तो सुरक्षित जंगल का दावा खोखला नजर आता है.
हाथी, बाघ, तेंदुआ, भालू और बाइसन जैसे संरक्षित वन प्राणी लगातार असामयिक मौत का शिकार हो रहे हैं। सवाल यह है कि क्या हम केवल जंगल बचा रहे हैं या जंगल के जीवन को भी खोते जा रहे हैं?
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, छत्तीसगढ़ में अब तक 348 शेड्यूल्ड वन प्राणियों की मौत दर्ज की जा चुकी है। इनमें सबसे अधिक संख्या हाथियों की है।
तेंदुआ, भालू और बाइसन भी खतरे में
बाघ और हाथी ही नहीं, तेंदुए सड़क और रेल दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। भालू और बाइसन कई बार अवैध शिकार या जहर के कारण मर रहे हैं। विकास परियोजनाओं के बीच वन्यजीवों के लिए सुरक्षित रास्तों की कमी इन मौतों की एक बड़ी वजह है।
एक्सपर्ट व्यू
छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ बचाना नहीं है, बल्कि पूरे वन इकोसिस्टम को संतुलित और सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में वन्यजीवों की मौत के आंकड़े समाज और शासन दोनों के लिए गंभीर चेतावनी हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका असर केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मानव जीवन और पर्यावरण संतुलन पर भी पड़ेगा।
हाथियों की करंट से मौत को महज हादसा समझना बड़ी भूल होगी। यह स्पष्ट रूप से बिजली विभाग, वन विभाग और जिला प्रशासन के बीच जमीनी तालमेल की कमी को दर्शाता है। विशेषज्ञ आम नागरिकों से अपील करते हैं कि अवैध बिजली तार, झूलते तार या जंगल के आसपास खतरे की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और वन्यजीवों की जान बचाई जा सके।
- केके बिसेन, सेवानिवृत्त आईएफएस
हाथी कॉरिडोर टूटे, संघर्ष बढ़ा
छत्तीसगढ़ में हाथियों के पारंपरिक मूवमेंट रूट यानी कॉरिडोर, झारखंड और ओडिशा से जुड़े हुए हैं। लेकिन खनन, सड़क, रेल लाइन और बस्तियों के विस्तार ने इन रास्तों को बाधित कर दिया है। नतीजा यह हुआ कि हाथी गांवों और खेतों में घुस रहे हैं.
फसल नुकसान से नाराज ग्रामीण कई बार करंट या अन्य खतरनाक उपाय अपनाते हैं, जिसकी कीमत हाथियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।
राज्य में वन क्षेत्र को सुरक्षित रखने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण पर लगातार काम किया जा रहा है। हाथियों की करंट से मौत के मामलों में अवैध बिजली तार हटाने, दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने और बिजली विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
- अरुण कुमार पांडेय, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ