2026 का सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर: 1.41 करोड़ के इनामी 52 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण
छत्तीसगढ़ शासन की 'पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन' नीति के तहत बीजापुर जिले में माओवादी उन्मूलन अभियान को एक बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े कुल 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा, भय और जनविरोधी गतिविधियों का रास्ता छोड़ते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
इन सभी पर उनके पद, भूमिका और संगठनात्मक सक्रियता के आधार पर कुल 1 करोड़ 41 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो इस आत्मसमर्पण को अब तक के बड़े मामलों में शामिल करता है। आत्मसमर्पण करने वालों में 21 महिलाएं और 31 पुरुष शामिल हैं।
बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि माओवादी संगठन से जुड़े इन प्रमुख कैडरों ने हथियार डाल दिए हैं।
इन प्रमुख कैडरों ने डाले हथियार
ये कैडर दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी, आंध्र-ओडिशा बॉर्डर डिवीजन और भामरागढ़ एरिया कमेटी से जुड़े रहे हैं। मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख कैडरों में शामिल हैं
डीवीसीएम लक्खू कारम उर्फ अनिल, निवासी एड्समेटा थाना गंगालूर, माड़ डिवीजन – इस पर बड़ी राशि का इनाम घोषित था।
पीपीसीएम लक्ष्मी माड़वी उर्फ रत्ना, निवासी पोटेनार थाना जांगला, कंपनी नंबर-07।
चिन्नी सोढ़ी उर्फ शांति, निवासी कमलापुर थाना उसूर।
भीमा कारम, विष्णु मंडावी उर्फ किरण, मोती कोरसा - पश्चिम बस्तर डिवीजन और ओडिशा स्टेट कमेटी।
माड़ डिवीजन की एसीएम हुंगी कारम उर्फ अंजली, आयतू हपका, कमला भोगाम, ललिता मुचाकी, गौरी कुड़ियम, बोदी हेमला, बाबू अंगनपल्ली, सुखराम कुड़ियम, पंडरू पोटाम और लक्की ओयाम भी इस समूह में शामिल हैं।
जिले में अब तक 824 माओवादी आत्मसमर्पण
01 जनवरी 2024 से अब तक जिले में कुल 824 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। वहीं, 1126 माओवादी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 223 माओवादी विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
बीजापुर पुलिस प्रशासन ने बताया कि पूना मारगेम नीति माओवादी कैडरों के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने अन्य माओवादी कैडरों से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें।