नक्सलियों के परिजनों की भावुक अपील- घर लौट आओ, हम राह देख रहे हैं

Update: 2026-01-20 05:43 GMT

गरियाबंद के जंगलों में सक्रिय नक्सलियों को लेकर इस बार आवाज बंदूक की नहीं, परिवार की है। 8 लाख की इनामी नक्सली ऊषा उर्फ संगीता और बलदेव उर्फ बामन से उनकी मां और भाई ने कैमरे पर हाथ जोड़कर घर लौट आने की गुहार लगाई है। यह अपील ऐसे वक्त सामने आई है, जब नक्सल विरोधी अभियान तेज है और सरकार की तय डेडलाइन भी करीब आती जा रही है।

परिजनों की अपील, वीडियो में छलका दर्द

सामने आए वीडियो में ऊषा और बलदेव के परिजन तेलुगु और गोंडी भाषा में भावुक अपील करते दिख रहे हैं। मां की सिसकियां और भाई की टूटती आवाज साफ बताती है कि यह सिर्फ आत्मसमर्पण की बात नहीं, बल्कि टूटे परिवार को जोड़ने की आखिरी कोशिश है. परिजनों का कहना है कि अब बहुत हो चुका, जंगल छोड़ो और घर लौट आओ। उनका डर भी साफ झलकता है कि अगर समय रहते सरेंडर नहीं हुआ, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

पूर्व नक्सलियों ने भी दिया संदेश

इस अपील में वे लोग भी शामिल हैं, जो कभी इसी रास्ते पर थे। सरेंडर कर चुके पूर्व नक्सलियों ने ऊषा और बलदेव से सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ लेने और सामान्य जीवन में लौटने की बात कही है. जानसी, सुनील (डीवीसीएम) और दीपक (एलजीएस कमांडर) जैसे नाम, जिन पर कभी लाखों का इनाम था, अब खुले तौर पर कह रहे हैं कि हथियार छोड़ने के बाद जिंदगी बदली है। उनका संदेश साफ है-हम लौट आए, तुम भी लौट आओ।

सरकार की डेडलाइन और बढ़ता दबाव

नक्सल उन्मूलन को लेकर सरकार ने मार्च 2026 तक की समयसीमा तय कर रखी है। बस्तर से लेकर गरियाबंद तक सुरक्षाबल लगातार अंदरूनी इलाकों में ऑपरेशन चला रहे हैं. गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन में अब गिने-चुने बड़े नक्सली नाम ही बचे हैं। यही वजह है कि परिजनों को डर है, अगर अब भी देर हुई तो हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा।

‘लौट आओ, बहुत देर हो जाएगी’

ऊषा उर्फ संगीता और बलदेव उर्फ बामन के लिए यह सिर्फ सरकार का संदेश नहीं है, बल्कि घर से उठी करुण पुकार है। मां चाहती है कि बेटी उसकी बुढ़ापे की लाठी बने, भाई चाहता है कि बहन सुरक्षित लौटे. यह देखना अहम होगा कि परिजनों और पूर्व साथियों की यह अपील जंगलों में छिपे नक्सलियों के फैसले को बदल पाती है या नहीं।

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