किसान क्रेडिट कार्ड में 646 करोड़ की गड़बड़ी

Update: 2026-01-14 05:48 GMT

अंबिकापुर में 43 और बरमकेला में 9 करोड़ के घोटाले की पुष्टि

छत्तीसगढ़ में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आरोप है कि केसीसी में कुल 646 करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई है, जिसमें अंबिकापुर में 43 करोड़ और बरमकेला में 9 करोड़ रुपए के घोटाले की पुष्टि हो चुकी है। इस भ्रष्टाचार मामले की जांच राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) करेगी.

रायपुर स्थित सहकारी (अपेक्स) बैंक मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बैंक के अध्यक्ष केदारनाथ गुप्ता ने कहा कि भ्रष्टाचार करने वाला कोई भी बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने बताया कि बैंक में हुई सभी गड़बड़ियों की जांच ईओडब्ल्यू से कराई जाएगी।

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आधुनिक तकनीक

अपेक्स बैंक अध्यक्ष ने बताया कि ई-केसीसी और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं के कारण फर्जी ऋण बांटने की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है। अब बैंकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है. किसानों की सहूलियत के लिए ‘रुपे एटीएम कार्ड’ की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे वे अपनी जरूरत के अनुसार 40 हजार रुपए तक आसानी से निकाल सकते हैं. उन्होंने बताया कि बैंक अब कृषि ऋण के साथ-साथ किसानों को आवास ऋण की सुविधा भी प्रदान कर रहा है। बैंक से जुड़े किसानों की संख्या अब बढ़कर 15 लाख 56 हजार तक पहुंच गई है।

घोटाले का खुलासा

वर्ष 2024-25 में अपेक्स बैंक ने 15 लाख 22 हजार किसानों को 7,908 करोड़ रुपए के केसीसी लोन दिए थे। 2025-26 में यह आंकड़ा 15 लाख 56 हजार किसानों और 7,262 करोड़ रुपए का रहा। यानी किसानों की संख्या में वृद्धि हुई, लेकिन 646 करोड़ रुपए कम लोन के रूप में वितरण होने से गड़बड़ी की जानकारी सामने आई. इस दौरान किसानों की तरफ से लगातार शिकायतें भी आ रही थीं.

किसानों पर असर

सरगुजा जिले के किसान एक बार फिर कर्ज के बोझ तले दब गए। केरजू, कुनमेरा, ढोढ़ागांव, बंशीपुर और हरदीडांड के दो हजार से ज्यादा किसानों के नाम पर उनके वास्तविक कर्ज से दस गुना ज्यादा राशि दर्ज की गई। उदाहरण के लिए, जिन किसानों ने 30 हजार रुपए का लोन लिया था, उनके नाम पर 3 लाख रुपए का कर्ज दर्ज किया गया. सोमवार को करीब 200 से ज्यादा किसान शिकायत लेकर कलेक्टर अजीत वसंत के पास पहुंचे, जिन्होंने जांच कराने का आश्वासन दिया। वहीं पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने इसे करोड़ों के फर्जी लोन का घोटाला बताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

प्रबंधक की आत्महत्या

सीतापुर ब्लॉक की सहकारी समिति में कार्यरत प्रबंधक दिनेश गुप्ता ने 25 दिसंबर की रात घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। माना जा रहा है कि फर्जी लोन की जानकारी और बढ़ते दबाव के कारण ही उन्होंने यह कदम उठाया।

पीड़ितों की शिकायतें

नेतराम धुर्वे, केरजू गांव: मैंने 30 हजार रुपए का कर्ज लिया था, लेकिन मेरे नाम पर तीन लाख रुपए का कर्ज दिखाया गया और धान बिक्री की रकम समायोजित नहीं की गई.

कमल कुजूर, केरजू गांव: हमने बैंक से कोई लोन नहीं लिया, लेकिन हमारे नाम पर दो लाख रुपए का कर्ज दिखाया गया. धान बिक्री जमा होने के बावजूद पैसे नहीं दिए गए.

कमला भोदरो, केरजू गांव: हमारे नाम पर फर्जी लोन दर्ज किया गया और हमें वास्तविक रकम नहीं मिली.

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