भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026–27 संसद के पटल पर रखते हुए पर्यटन एवं आतिथ्य के क्षेत्र में कई नवीन घोषणाएँ की हैं, जिसका सकारात्मक प्रभाव देश के पर्यटन उद्योग पर पड़ेगा। यह बजट भारत को वैश्विक पटल पर पुनः स्थापित करने में सहायक होगा एवं घरेलू अर्थव्यवस्था को भी आगे ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।
भारत की प्राचीन संस्कृति, समृद्ध विविधतापूर्ण भौगोलिक विशेषता एवं तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था एवं राजनीतिक स्थिरता सम्पूर्ण विश्व से पर्यटकों को बरबस ही आकर्षित कर रही है। आज के राजनीतिक व आर्थिक उथल-पुथल के वैश्विक परिदृश्य में भारत ने अपनी अलग ही पहचान बनाई है।
वित्त वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में 254200 करोड़ रुपये का प्रावधान पर्यटन एवं आतिथ्य को बढ़ावा देने के लिये किया गया है। देश भर में समन्वित विकास योजनाओं के विस्तार, डिजिटल इंडिया एवं उद्योग-मुखी योजनाओं के आवश्यकताओं को परिप्रेक्ष्य में रखकर डिज़ाइन, स्वच्छता, पर्यटन, धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन के साथ कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देने की संकल्पना इस बजट में शामिल है।
साथ ही यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की घोषणा इस क्षेत्र में मानव संसाधन की कमी एवं बदलते परिदृश्य में अप-स्किलिंग की आवश्यकता को पूरा करने का एक अच्छा प्रयास है।
पर्यटन विकास के लिये बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता के साथ-साथ विकास हेतु टूरिज्म गाइड्स का भी एक अन्य रोल है। पूर्व में भारतीय पर्यटन एवं यात्रा संस्थान यह कार्य कर रहा था, बाद में इनेबल्ड इंडिया टूरिज्म फैसिलिटेटर सर्टिफिकेट (IITFC/आईआईटीएफसी) कार्यक्रम की विकलता पर्यटन गाइड व्यवसाय को तथा इस प्रयास को उचित गति प्रदान नहीं कर पाया था। वित्त मंत्री की यह घोषणा कि दस हजार पर्यटन गाइडों को आईआईटीएफसी के सहयोग से प्रशिक्षित कर देश के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर तैनात किया जायेगा, जिससे स्थल एवं राष्ट्र की छवि को बनाने का एक अच्छा प्रयास माना जा सकता है।
सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत स्थलों के डिजिटाइजेशन के लिये नेशनल डिजिटल कॉमन फ्रेमवर्क की स्थापना एक सराहनीय प्रयास है। डिजिटाइजेशन के युग में विश्व पटल पर पर्यटन आकर्षण को बढ़ाने का यह एक नई पहचान प्रदान करेगा। इको टूरिज्म जो कि कोरोना काल के बाद एक अहम व उभरता पर्यटन ट्रेंड है, विशेष रूप से हिमालय, उत्तराखण्ड, जम्मू-कश्मीर व सात राज्यों के पश्चिमी घाटों में सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल का विकास व समुद्री तथा नदी तटों पर ट्रेल्स का बनाया जाना भी इको टूरिज्म को बढ़ावा देगा।
पूर्वोत्तर राज्यों में बौद्ध सर्किट विकास एवं सारनाथ, हरिद्वार जैसे 15 पुरातात्विक स्थलों को जीवन सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किये जाने की घोषणा धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आगे ले जाने में सहायक सिद्ध होगी। पाँच क्षेत्रों में मेडिकल टूरिज्म की स्थापना में निजी क्षेत्र की भागीदारी व आयुष केन्द्र का सहयोग इस उभरते भारत की एक नई छवि स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बजट घोषणाएँ अधोसंरचना के अन्तर्गत द्वितीय दर्जे के पर्यटक स्थलों व तटीय क्षेत्रों में सीमेंट के उपयोग व घरेलू निर्माण के साथ ही 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरों की घोषणा रेल कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करते हुए घरेलू व अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देगी। एक और प्रस्ताव टैक्स राहत के रूप में वित्त मंत्री ने दिया है, जिसमें टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) को 15–20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया है।
उपरोक्त सभी घोषणाएँ “एक भारत, श्रेष्ठ भारत एवं आत्मनिर्भरता के साथ विकसित भारत 2047” की संकल्पना को ध्यान में रखते हुए भारत के पर्यटन एवं आतिथ्य उद्योग को एक नई पहचान देंगी।
लेखक: वरिष्ठ प्राध्यापक संदीप कुलश्रेष्ठ वर्तमान में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में निर्देशक पर्यटन पद पर कार्यरत हैं।