तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं पर तमाम तरह से प्रतिबंध लगाए हुए हैं, परंतु अब नया प्रतिबंध हालांकि उनपर नहीं है, परंतु वह उनके जीवन से ही जुड़ा हुआ है और उसके कारण अफगानिस्तान की तमाम महिलाओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है। यह मामला है महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक गोलियों पर अघोषित प्रतिबंध का। मीडिया के अनुसार तालिबान के लोग डॉक्टर्स के पास जाकर उन्हें धमका रहे हैं कि यदि गर्भनिरोधक दवाएं दी तो वे क्लीनिक बंद करा देंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत ही तेजी से यह पाबंदी लागू हो रही है। ग्रामीण जवजजान सूबे में पिछले 30 वर्षों से क्लीनिक चला रही डॉक्टर का कहना है कि जैसे ही तालिबान सत्ता में आए हैं, वैसे ही गर्भनिरोधक गोलियां कम होना शुरू हो गईं। कुछ ही महीनों में वे खत्म हो गईं और उसका यह भी कहना है कि पहले क्लीनिक में आने वाली 70 महिलाओं में से 30 महिलाओं को गर्भ निरोधक गोलियां चाहिए होती थीं, मगर अब वह उन्हें मना कर देती है।
बदगहीस में तालिबान लड़ाकों ने एक निजी क्लीनिक पर जाकर उनके कर्मचारियों को सभी गर्भनिरोधकों को नष्ट करने का हुकूम दिया। और यह भी कहा कि अगर महिलाओं को यह देते हुए देख लिया तो वे उसका क्लीनिक बंद कर देंगे। और इसके चलते तमाम महिलाओं को स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। महिलाएं असुरक्षित गर्भ का शिकार हो रही हैं, जानलेवा गर्भपात का शिकार हो रही हैं और उस पर सबसे बड़ा ज़ुल्म यह कि दवाइयाँ भी नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 440 से अधिक अस्पताल और क्लीनिक वर्ष 2025 तक या तो बंद हो चुके हैं या फिर अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग के कम होने के कारण सेवाएं कम कर चुके हैं।
जो पहाड़ों से घिरे गाँव हैं, और सड़कें भी मिट्टी की ही हैं, वहाँ पर दाइयों का कहना है कि क्लीनिक पहुँचने से पहले ही महिलाओं की ब्लीडिंग शुरू हो जाती है और यहाँ तक कि कुछ तो रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं। अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उनमें खून की कमी है, विटामिन की कमी है और उनका शरीर गर्भ के लिए बहुत कमजोर है। इसके साथ ही महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा आम है और मीडिया के अनुसार शरीर पर होने वाली इस हिंसा के चलते ही तमाम महिलाओं का गर्भपात हो जाता है। क्योंकि वे न ही कहीं भाग सकती हैं, और न ही कहीं पर वे शरण ले सकती हैं और साथ ही वे गर्भपात की गोलियां भी नहीं खा सकती हैं।
zantimes.com अपनी रिपोर्ट में कई महिलाओं की कहानी बताता है। इसमें कंधार की “रेहाना” (नाम परिवर्तित) यह बताती है कि कैसे उसकी बहन सकीना* जो कि कम उम्र में विधवा हो गई थी, उसे उसके ससुरालवालों ने इसलिए पीटा था क्योंकि उसने अपने देवर से शादी करने से इनकार कर दिया था। और रेहाना के अनुसार उसकी बहन का बच्चा भी पेट में ही मर गया था।
कंधार में हमीदा* नामक दाई ने भी यही बताया कि कैसे हिंसा तमाम गर्भपातों का मुख्य कारण है। उसका कहना है कि रोज कम से कम 100 प्रसव होते हैं। सामान्य, समय से पहले, सीजेरियन और मिसकैरेज। उसका कहना था कि कम से काम 6 गर्भपात रोज वह देखती है, और उनमें से कई पीटने के कारण होते हैं तो वहीं कई भारी सामान उठाने के कारण होते हैं। जहां तालिबान ने नए कानूनी कोड्स के माध्यम से अपनी कट्टरपंथी सोच एक बार फिर से शासन पर चस्पा दी है तो वहीं महिलाओं के लिए जीवन कठिन से और कठिन होता जा रहा है।
लेखिका सोनाली मिश्रा