जी राम जी योजना: केंद्रबिंदु अंतिम पंक्ति का व्यक्ति

डॉ. हरिशंकर कंसाना

Update: 2026-01-31 04:38 GMT

विकसित भारत–जी राम जी विधेयक 2025’ अब कानून का रूप ले चुका है। इसे लेकर जनजागरण भी हो रहा है, किंतु कुछ भ्रम और आशंकाएं अभी भी बनी हुई हैं। यह मनरेगा की जगह लाई गई है या नहीं, इसमें नया क्या है, इसको लेकर जिज्ञासा स्वाभाविक है। इस कानून के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को अब प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जा रही है। यह योजना ‘विकसित भारत 2047’ के अनुरूप ग्रामीण आजीविका और विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से लाई गई है।

इस योजना का वित्तीय भार मुख्यतः केंद्र सरकार वहन करेगी, वहीं राज्यों का भी सहयोग लिया जाएगा। इसे विकेंद्रीकृत योजना के रूप में ग्रामसभा द्वारा तय वरीयताओं और लक्ष्यों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा।

ग्राम पंचायत स्तर पर अकुशल मजदूरी के इच्छुक व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना, उनकी आजीविका को सुरक्षित करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण करना इस कानून का मूल उद्देश्य है। आय सुरक्षा के साथ-साथ ग्राम की सामूहिक संपत्ति का विकास हो, यह इसकी दीर्घकालिक दृष्टि है। रोजगार न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का भी स्पष्ट प्रावधान है, वह भी निश्चित समयावधि में। समय पर भुगतान से अंतिम पायदान पर खड़े ग्रामीण परिवारों को दर-दर की ठोकरें खाने और असमय उधारी के फंदे में फंसने से बचाया जा सकता है।

जी राम जी योजना हर उस अभागे किसान की सेवा के संकल्प के साथ आई है, जो हर बार परिवार और गांव की भलाई की आशा में आगे बढ़ता है, किंतु बार-बार ठहर भी जाता है। मुंशी प्रेमचंद के महाकाव्य ‘गोदान’ का होरी इसी अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की करुण गाथा है। इस योजना को बहुआयामी विचार के परिणामस्वरूप नवीन संकल्पना और उत्कृष्ट सोच के साथ प्रस्तुत किया गया है। सोच कितनी भी ऊंची हो, उसे जमीन पर उतारने के लिए जमीन पर पैर रखना आवश्यक होता है। अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के गांव और उसकी वास्तविक स्थिति को जाने बिना कोई भी परिकल्पना अधूरी ही रहती है।

इस योजना में अधोसंरचना विकास का स्पष्ट संकल्प दिखाई देता है। इसके अंतर्गत नहर, तालाब, वृक्षारोपण अभियान, अनाज भंडारण, स्व-सहायता समूह, सामुदायिक भवन, दुग्ध डेयरी, ग्राम पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्र, कचरा प्रबंधन, ग्राम उद्योग, पशुपालन, उद्यानिकी, भूजल संरक्षण और अग्निशमन जैसे कार्यों को सम्मिलित किया गया है। मध्यप्रदेश के संदर्भ में गोशाला निर्माण, जल गंगा संवर्धन अभियान और 15 विभागों की संयुक्त योजनाओं की भी बात सामने आती है।

इन प्रयासों से अधोसंरचनात्मक विकास के साथ-साथ स्थायी आजीविका, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। इसका सीधा लाभ वंचित परिवारों के युवाओं और मातृशक्ति को प्राप्त होगा। मौसम की प्रतिकूलता और जुताई-बुवाई के समय का भी इसमें ध्यान रखा गया है।

जी राम जी योजना को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने के लिए आधुनिक तकनीकों के प्रयोग पर विशेष बल दिया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और मस्टर रोल जैसी व्यवस्थाएं इसमें शामिल हैं। दस्तावेजों के माध्यम से कर्मचारियों, मजदूरी और संपादित कार्यों का विवरण उपलब्ध रहेगा, जिससे न केवल कानूनी अनुपालन सुनिश्चित होगा बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। बायोमेट्रिक उपस्थिति से वास्तविक पात्र व्यक्ति को लक्षित किया जा सकेगा।

एआई के माध्यम से ग्राम का सटीक सर्वेक्षण, सीवर लाइन, बिजली खंभे, जल निकासी जैसी आवश्यकताओं की पहचान संभव होगी, जिसका दीर्घकालिक लाभ पूरी पंचायत को मिलेगा। मस्टर रोल व्यवस्था से धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा, भुगतान का सही मूल्यांकन होगा और सामाजिक अंकेक्षण भी अधिक प्रभावी बन सकेगा। वास्तव में, धोखाधड़ी का शिकार अक्सर अंतिम पंक्ति का व्यक्ति ही होता है।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि जी राम जी योजना, मनरेगा से दो-तीन कदम नहीं बल्कि कई कदम आगे की सोच के साथ लाई गई है। यह योजना महात्मा गांधी के स्वदेशी, स्वराज और आत्मनिर्भरता के विचार को साकार करने की क्षमता रखती है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि देशभर की सभी ग्राम पंचायतों में इसे समझने और सहजता से स्वीकार करने वाले लोग आसानी से मिल जाएंगे।

प्रधानमंत्री द्वारा इस योजना के बजट को 35 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 95 हजार करोड़ रुपये करना, इसे तीन गुना मजबूती प्रदान करता है। कृषि आधारित उद्योगों और रोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ गांवों में बांध, स्कूल, अस्पताल, सोलर पंप, ग्राम सड़कें और हाट बाजार विकसित करने की भी चिंता की गई है। इन सभी परियोजनाओं में इच्छुक अकुशल श्रमवीरों की आवश्यकता होगी। इन्हीं अंतिम पंक्ति के श्रमवीरों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण और स्थानीय आय के स्रोतों का निर्माण संभव होगा।

जी राम जी योजना की सफलता के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। आजीविका मिशन, जल सुरक्षा, वाटरशेड विकास, भूजल संरक्षण, सिंचाई और वनीकरण जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है। किंतु इसके साथ ही अकुशल मजदूरों का सटीक सर्वेक्षण, पात्र व्यक्तियों की सही पहचान और मजदूरी कार्य के जरिए सामुदायिक संपत्ति निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करना भी आवश्यक होगा।

इस दृष्टि से ग्राम पंचायतों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और पंचायत क्षेत्र के जागरूक नागरिकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। यह भी ध्यान रखना होगा कि आज का अकुशल मजदूर कभी किसान रहा है, जो परिवार के पालन-पोषण के लिए मजबूरी में मजदूरी करता है। इसलिए उसके प्रति सम्मान, सुरक्षा, संवेदना और आत्मीयता का भाव रखना अनिवार्य है।

वास्तव में अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को आगे लाने के लिए ही यह योजना अस्तित्व में आई है। अब आवश्यकता है ऐसे समर्पित और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की, जो हर ग्राम और कस्बे में इस योजना को समझें, स्वीकार करें और पूरे मन से इसे धरातल पर उतारने का संकल्प रखें।

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