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आलू नहीं, इसे खाने का तरीका बढ़ा रहा खतरा

आलू नहीं, इसे पकाने का तरीका बन रहा बीमारी की वजह! 37 साल के शोध में हुआ बड़ा खुलासा

क्या आलू वाकई डायबिटीज की वजह बनता है? 37 साल तक चले बड़े शोध में सामने आया कि असली खतरा आलू नहीं, बल्कि उसे डीप फ्राई करके खाने से है। जानिए विशेषज्ञों ने क्या खुलासा किया।


आलू नहीं इसे पकाने का तरीका बन रहा बीमारी की वजह 37 साल के शोध में हुआ बड़ा खुलासा

आलू भारतीय रसोई का एक अहम हिस्सा है। सब्जी से लेकर स्नैक्स तक , शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां इसका इस्तेमाल न होता हो। लेकिन लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि क्या आलू खाने से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है? अब इस सवाल पर एक बड़े शोध ने दिलचस्प जवाब दिया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, समस्या केवल आलू में नहीं है बल्कि उसे किस तरह पकाया और खाया जाता है.  यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। खासकर फ्रेंच फ्राइज, चिप्स और अन्य डीप फ्राइड आलू वाले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। यही वजह है कि शोधकर्ताओं ने लोगों को अपने खान-पान की आदतों पर दोबारा विचार करने की सलाह दी है।

37 साल तक चला अध्ययन, 2 लाख से ज्यादा लोगों पर नजर

बीएमजे जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में 1984 से 2021 तक 2.05 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य और खान-पान की आदतों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में शामिल सभी प्रतिभागी शुरुआत में डायबिटीज, कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से मुक्त थे।

हर चार साल में उनकी डाइट और जीवनशैली से जुड़ी जानकारी एकत्र की गई। लंबे फॉलो-अप के दौरान 22,299 लोगों में टाइप-2 डायबिटीज विकसित हुई, जिसके बाद शोधकर्ताओं ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों और बीमारी के बीच संबंधों का अध्ययन किया।  दरअसल, इस शोध की खास बात यह रही कि इसमें केवल आलू खाने पर नहीं, बल्कि उसे पकाने के विभिन्न तरीकों के प्रभाव पर भी ध्यान दिया गया।

आलू नहीं, डीप फ्राई करने से बढ़ा बड़ा खतरा

शोध में पाया गया कि सप्ताह में तीन बार आलू खाने से टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम मामूली रूप से बढ़ सकता है। लेकिन जब आलू को पकाने के तरीके के आधार पर आंकड़ों का विश्लेषण किया गया तो नतीजे चौंकाने वाले थे फ्रेंच फ्राइज या डीप फ्राई किए गए आलू को सप्ताह में तीन बार खाने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग 20 प्रतिशत तक अधिक पाया गया। दूसरी ओर, उबले हुए, बेक किए गए या मैश किए गए आलू खाने वालों में ऐसा कोई बड़ा जोखिम नहीं देखा गया।

यही कारण है कि शोधकर्ताओं ने कहा है कि असली समस्या आलू नहीं बल्कि डीप फ्राइंग की प्रक्रिया है। तेल में तलने से खाद्य पदार्थों की कैलोरी बढ़ जाती है और उनकी रासायनिक संरचना में बदलाव आता है, जो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा दे सकता है।

दूसरे कार्बोहाइड्रेट विकल्पों से क्या मिला संकेत?

अध्ययन में यह भी जांचा गया कि यदि आलू की जगह अन्य कार्बोहाइड्रेट स्रोतों का सेवन किया जाए तो क्या परिणाम सामने आते हैं  शोधकर्ताओं ने पाया कि यदि सप्ताह में तीन बार आलू की जगह साबुत अनाज जैसे ओट्स, मिलेट्स या ब्राउन राइस का सेवन किया जाए, तो टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग 8 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

हालांकि एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया कि उबले या बेक किए हुए आलू की जगह सफेद चावल खाने से जोखिम कम होने के बजाय बढ़ सकता है। इससे साफ होता है कि केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी जगह क्या चुना जा रहा है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

क्या अब आलू खाना बंद कर देना चाहिए?

इस शोध के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या आलू पूरी तरह छोड़ देना चाहिए? विशेषज्ञों का जवाब है नहीं। आहार विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित मात्रा में और सही तरीके से तैयार किया गया आलू स्वस्थ आहार का हिस्सा बन सकता है। खासकर उबले हुए, बेक किए हुए या कम तेल में पकाए गए आलू अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माने जाते हैं।

घर पर आलू बनाते समय छिलके के साथ पकाने से उसमें मौजूद फाइबर काफी हद तक सुरक्षित रहता है। वहीं फ्रेंच फ्राइज, चिप्स और बार-बार तेल में तली गई चीजों का सेवन सीमित करना अधिक लाभकारी हो सकता है। फिलहाल, यह शोध एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह दोषी ठहराने से पहले उसके सेवन के तरीके को समझना जरूरी है।

आलू नहीं, बल्कि डीप फ्राई की आदत आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। ऐसे में सही कुकिंग मेथड और संतुलित आहार अपनाकर डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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