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भारत की डिजिटल जनगणना

भारत में जनगणना की नई शुरुआत: दुनिया के अनोखे मॉडल्स के बीच भारत की ऐतिहासिक विरासत और डिजिटल भविष्य

ब्राज़ील से डेनमार्क तक अलग-अलग तरीके, ब्रिटेन में 1801 से शुरुआत, भारत में दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना फिर चर्चा में


भारत में जनगणना की नई शुरुआत दुनिया के अनोखे मॉडल्स के बीच भारत की ऐतिहासिक विरासत और डिजिटल भविष्य

 अनुराग तागड़े 

इंदौर। भारत एक बार फिर जनगणना की तैयारी में जुट गया है। कोविड-19 के कारण टली यह प्रक्रिया अब 2026–27 में नए डिजिटल स्वरूप के साथ सामने आ रही है। यह केवल एक प्रशासनिक अभ्यास नहीं, बल्कि देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा डेटा अभियान है।दुनिया में जहां जनगणना के तरीके तेजी से बदल रहे हैं, वहीं भारत अपनी पारंपरिक “घर-घर गणना” प्रणाली को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर एक नए युग में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है।

 दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रणाली

भारत की जनगणना विश्व की सबसे विशाल और जटिल प्रक्रियाओं में से एक है।

  • आधुनिक जनगणना की शुरुआत: 1872
  • पहली नियमित जनगणना: 1881
  • हर 10 वर्ष में आयोजन
  • 2011 में 121 करोड़ (1.21 अरब) लोगों की गणना

भारत में यह प्रक्रिया “कैनवसिंग मेथड” से होती है, जिसमें लाखों गणनाकर्ता घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करते हैं। इसमें केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, आवास, सामाजिक संरचना और संसाधनों तक का विस्तृत डेटा शामिल होता है।

दुनिया के अनोखे जनगणना मॉडल

आज जनगणना “गिनती” से आगे बढ़कर “डेटा साइंस” बन चुकी है। विभिन्न देशों ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग मॉडल विकसित किए हैं

  • डेनमार्क और फिनलैंड: बिना सर्वे की जनगणना
  • सरकारी डेटाबेस (कर, भवन, जनसंख्या) के आधार पर पूरी गणना तेज, सस्ती और सटीक।
  • अमेरिका और जापान: हाइब्रिड मॉडल
  • घर-घर सर्वे के साथ ऑनलाइन फॉर्म पारंपरिक और डिजिटल का मिश्रण।

ब्राज़ील: बहु-स्तरीय डेटा प्रणाली

देश से लेकर मोहल्ले तक कई स्तरों पर डेटा शहरी और क्षेत्रीय योजना के लिए बेहद उपयोगी।

  • ब्रिटेन: 1801 से शुरू परंपरा
  • 1801 में पहली आधुनिक जनगणना
  • 1841 से व्यक्तिगत जानकारी शामिल

अब डिजिटल विकल्पों की ओर बढ़ाव

नॉर्डिक देश (नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड) पूरी तरह प्रशासनिक रिकॉर्ड आधारित जनगणना न सर्वे, न फॉर्म।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड

हर 5 साल में ऑनलाइन जनगणना स्वयं डेटा भरने की सुविधा।

फ्रांस: रोलिंग जनगणना मॉडल

हर साल आंशिक सर्वे कुछ वर्षों में पूरा देश कवर।

नई तकनीक: जनगणना का भविष्य

दुनिया भर में जनगणना अब तकनीक आधारित होती जा रही है इंटरनेट आधारित स्वयं-गणना,मोबाइल ऐप और टैबलेट ,जीपीएस मैपिंग, सैटेलाइट और बिग डेटा
भारत भी पहली बार डिजिटल और सेल्फ-एन्यूमरेशन प्रणाली अपनाने जा रहा है।

भारत की जनगणना के अद्भुत तथ्य

भारत की जनगणना को “डेटा महाकाव्य” कहना गलत नहीं होगा। इसके 2011 के  कुछ चौंकाने वाले तथ्य:

दुनिया की 17.5% आबादी भारत में

भारत, जो दुनिया के केवल 2.4% भू-भाग पर है, वैश्विक आबादी का लगभग 17.5% हिस्सा समेटे हुए है।

एक दशक में ‘ब्राज़ील जितनी आबादी’ जुड़ी

2001–2011 के बीच 18 करोड़ से अधिक लोगों की वृद्धि जो लगभग ब्राज़ील की आबादी के बराबर है।

ग्रामीण भारत की बड़ी हिस्सेदारी

  • करीब 68.8% आबादी गांवों में रहती है।
  • हर तीसरा भारतीय ‘माइग्रेंट’
  • लगभग 45 करोड़ लोग (37% से अधिक) अपने जन्म स्थान से अलग रहते हैं।
  • 24.8 करोड़ घरों का डेटा
  • देश के हर घर का रिकॉर्ड और परिवारों की जानकारी एकत्र।

साक्षरता दर 74%

  • शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार, विशेषकर महिलाओं में वृद्धि।
  • जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
  • संसाधनों और शहरी योजना के लिए बड़ी चुनौती और अवसर।

30 लाख से अधिक लोग करते हैं यह कार्य

भारत की जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभियान है। चुनौतियां: वैश्विक और राष्ट्रीय दोनों स्तर पर डेटा गोपनीयता , बढ़ती लागत , तेजी से बदलती जनसंख्या, राजनीतिक और सामाजिक बाधाएं।

भारत के सामने अवसर और दिशा

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी,मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर,आधार और डेटा नेटवर्क जैसी ताकतें हैं, जो उसे दुनिया का सबसे उन्नत जनगणना मॉडल बनाने में सक्षम बनाती हैं।

आंकड़ों में छिपा भारत का भविष्य

जनगणना केवल संख्या नहीं, बल्कि राष्ट्र की वास्तविक तस्वीर है।इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय होता है विकास योजनाएं, संसाधनों का वितरण और देश की नीतिगत दिशा। आज जब दुनिया डेटा आधारित निर्णयों की ओर बढ़ रही है, भारत के लिए यह समय है कि वह
परंपरा और तकनीक के संतुलन के साथ जनगणना को वैश्विक मॉडल बनाए।

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