केंद्र सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये की फंड ऑफ फंड्स योजना के दूसरे चरण के दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। डीप-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और नए स्टार्टअप्स को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की ‘फंड ऑफ फंड्स’ योजना के दूसरे चरण के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। माना जा रहा है कि इससे देश के हजारों स्टार्टअप्स को फंडिंग जुटाने में आसानी होगी।
खास बात यह है कि इस बार सरकार सिर्फ पारंपरिक स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं रहना चाहती। डीप-टेक, टेक्नोलॉजी आधारित मैन्युफैक्चरिंग और माइक्रो वेंचर कैपिटल जैसे सेक्टर्स पर विशेष फोकस रखा गया है। ऐसे में यह योजना आने वाले वर्षों में भारत के स्टार्टअप बाजार की दिशा बदल सकती है।
आखिर क्या है फंड ऑफ फंड्स योजना?
दरअसल, यह योजना स्टार्टअप्स में सीधे निवेश नहीं करती। सरकार सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष यानी AIFs के जरिए स्टार्टअप्स तक पैसा पहुंचाती है।
इस योजना का फायदा सिर्फ उन्हीं स्टार्टअप्स को मिलेगा जिन्हें उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी DPIIT से मान्यता मिली हुई है। सरकार का कहना है कि नए नियमों का मकसद निवेश प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इसके जरिए निजी निवेशकों को भी स्टार्टअप्स में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
किन सेक्टर्स पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस?
फिलहाल सरकार ने इस फंड को चार हिस्सों में बांटा है। इनमें डीप-टेक, माइक्रो वेंचर कैपिटल, टेक्नोलॉजी आधारित विनिर्माण और सेक्टर-एग्नोस्टिक फंड शामिल हैं। यही वजह है कि AI, रोबोटिक्स, क्लीन टेक, सेमीकंडक्टर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स के लिए यह बड़ा मौका माना जा रहा है।
अब समझिए, पिछले कुछ समय से भारतीय स्टार्टअप्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती शुरुआती निवेश जुटाने की रही है। खासकर छोटे शहरों और नए इनोवेशन आधारित स्टार्टअप्स को फंडिंग मिलना मुश्किल हो रहा था। सरकार इस गैप को भरने की कोशिश कर रही है।
SIDBI के साथ दूसरी एजेंसी भी संभालेगी जिम्मेदारी
इस योजना को लागू करने की शुरुआती जिम्मेदारी भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक यानी SIDBI को दी गई है। SIDBI फंड चयन और निगरानी की प्रक्रिया संभालेगा। हालांकि सरकार एक अतिरिक्त एजेंसी को भी शामिल करने जा रही है। माना जा रहा है कि इससे योजना की पहुंच और तकनीकी विशेषज्ञता दोनों बढ़ेंगी। ऐसे में छोटे और उभरते स्टार्टअप्स तक फंडिंग पहुंचाने की प्रक्रिया पहले से तेज हो सकती है।
कैसे होगा फंड का चयन?
सरकार ने इस बार जांच प्रक्रिया को काफी सख्त बनाया है। पहले कार्यान्वयन एजेंसी स्क्रीनिंग और ड्यू डिलिजेंस करेगी। इसके बाद वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी अंतिम मूल्यांकन करेगी। यह समिति निवेश रणनीति, टीम अनुभव और संभावित ग्रोथ जैसे पहलुओं की जांच करेगी। इसमें वल्लभ भंसाली, अशोक झुनझुनवाला, रेणु स्वरूप, चिंतन वैष्णव और राजेश गोपीनाथन जैसे अनुभवी नामशामिल हैं।
स्टार्टअप इकोसिस्टम पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस फैसले से भारत में निवेश का माहौल मजबूत होगा। खासकर ऐसे समय में जब कई स्टार्टअप्स फंडिंग संकट से जूझ रहे हैं, सरकार की यह पहल राहत दे सकती है। इसके अलावा छोटे शहरों के स्टार्टअप्स और शुरुआती चरण की कंपनियों को भी नए अवसर मिलने की उम्मीद है। यही वजह है कि इस योजना को भारत के स्टार्टअप सेक्टर के लिए बड़ा बूस्टर माना जा रहा है।