IPL 2026 के बीच BCCI ने सभी टीमों को ‘हनी ट्रैप’ और सुरक्षा खतरे को लेकर अलर्ट किया है। जानिए क्या होता है हनी ट्रैप, खिलाड़ी कैसे फंसते हैं और बोर्ड क्यों सख्त हुआ।
आईपीएल 2026 के बीच BCCI की एक चेतावनी ने क्रिकेट जगत में हलचल बढ़ा दी है। बोर्ड ने सभी 10 फ्रेंचाइजी को साफ शब्दों में कहा है कि खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा अब सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रही। खतरा होटल रूम, डगआउट और निजी मुलाकातों तक पहुंच चुका है।
बोर्ड को आशंका है कि कुछ लोग खिलाड़ियों के करीब पहुंचकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने, ब्लैकमेल करने या विवाद खड़ा करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से BCCI ने “हनी ट्रैप” जैसे जोखिमों को लेकर सख्त SOP जारी की है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब IPL दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग बन चुकी है और खिलाड़ियों की हर गतिविधि करोड़ों लोगों की नजर में रहती है।
आखिर क्या होता है ‘हनी ट्रैप’?
हनी ट्रैप एक सुनियोजित जाल होता है, जिसमें किसी व्यक्ति को भावनात्मक, रोमांटिक या शारीरिक आकर्षण के जरिए फंसाया जाता है। इसका मकसद सिर्फ रिश्ता बनाना नहीं होता। कई मामलों में इसके जरिए पैसे की उगाही, निजी वीडियो से ब्लैकमेलिंग या गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।
अक्सर सोशल मीडिया, पार्टियों या निजी मुलाकातों के जरिए टारगेट तक पहुंच बनाई जाती है। पहले दोस्ती होती है, फिर भरोसा और उसके बाद दबाव या ब्लैकमेल का खेल शुरू होता है। दुनियाभर में कई बड़े अधिकारी, कारोबारी, खिलाड़ी और रक्षा कर्मी ऐसे मामलों में फंस चुके हैं।
IPL में BCCI को क्यों बढ़ी चिंता?
BCCI की एंटी करप्शन और सिक्योरिटी यूनिट को इस सीजन में कई प्रोटोकॉल उल्लंघनों की जानकारी मिली थी। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ ने बिना अनुमति बाहरी लोगों को होटल के कमरों तक पहुंचने दिया। कई मामलों में टीम मैनेजर को यह तक पता नहीं था कि कौन व्यक्ति होटल फ्लोर तक पहुंच गया। बोर्ड को डर है कि ऐसी ढील भविष्य में बड़े विवाद या सुरक्षा संकट में बदल सकती है।
इसी वजह से BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने सभी टीमों को 8 पन्नों की एडवाइजरी भेजी। इसमें साफ कहा गया कि खिलाड़ियों की सुरक्षा और लीग की साख से समझौता नहीं किया जाएगा।
अब होटल रूम से लेकर डगआउट तक सख्ती
नई गाइडलाइन के मुताबिक अब कोई भी बाहरी व्यक्ति टीम मैनेजर की लिखित मंजूरी के बिना खिलाड़ी या सपोर्ट स्टाफ के कमरे में नहीं जा सकेगा। मेहमानों से मुलाकात सिर्फ होटल लॉबी या तय सार्वजनिक जगहों पर होगी। निजी कमरों में एंट्री पूरी तरह नियंत्रित रहेगी।
BCCI ने टीम मालिकों पर भी सख्ती दिखाई है। मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम, डगआउट या मैदान में जाकर खिलाड़ियों से बातचीत करना नियमों के खिलाफ माना जाएगा। बोर्ड का कहना है कि चाहे इरादा दोस्ताना ही क्यों न हो, लेकिन इससे मैच संचालन और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है।
वेपिंग विवाद के बाद भी बढ़ी निगरानी
इस सीजन में वेपिंग और ई-सिगरेट को लेकर भी विवाद सामने आए। कुछ खिलाड़ियों के वीडियो वायरल होने के बाद BCCI की आलोचना हुई थी। अब ड्रेसिंग रूम, टीम होटल, प्रैक्टिस एरिया और डगआउट में वेपिंग और ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। बोर्ड ने साफ कहा है कि भारतीय कानून के तहत ई-सिगरेट पहले से प्रतिबंधित है। ऐसे में IPL से जुड़े किसी भी व्यक्ति का इसमें शामिल होना नियम और कानून दोनों का उल्लंघन माना जाएगा।
खिलाड़ियों पर सिर्फ खेल नहीं, छवि बचाने का भी दबाव
IPL अब सिर्फ क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं रह गया। यहां खिलाड़ियों की निजी जिंदगी, सोशल मीडिया एक्टिविटी और सार्वजनिक व्यवहार भी लगातार निगरानी में रहता है। ऐसे में किसी भी विवाद का असर सिर्फ खिलाड़ी पर नहीं, बल्कि पूरी टीम और लीग की साख पर पड़ता है। BCCI इसी जोखिम को शुरुआती स्तर पर रोकना चाहता है।
बोर्ड को डर है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं की गई, तो भविष्य में फिक्सिंग, ब्लैकमेलिंग या निजी विवाद जैसे मामले फिर IPL की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।