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क्या भारत बांग्लादेश को सस्ता डीज़ल देता है?

Fact Check: क्या भारत अपने लोगों से महंगा और बांग्लादेश को सस्ता डीज़ल बेच रहा है?

सोशल मीडिया पर दावा है कि भारत बांग्लादेश को 51 में डीज़ल देता है। जांच में पता चला कि 51 रिफाइनरी का टैक्स-फ्री एक्सपोर्ट प्राइस है, जबकि भारत में पंप रेट में टैक्स और अन्य लागत शामिल होती है।


fact check क्या भारत अपने लोगों से महंगा और बांग्लादेश को सस्ता डीज़ल बेच रहा है

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि भारत अपने नागरिकों को लगभग 87– 90 रुपए प्रति लीटर में डीज़ल बेचता है, जबकि बांग्लादेश को यही डीज़ल करीब 51 रुपए प्रति लीटर में दिया जाता है। इस दावे को लेकर कई तरह की बहस भी देखने को मिल रही है। हालांकि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि यह तुलना पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि दोनों कीमतें अलग-अलग स्तर की हैं।

फिर 51 रुपए प्रति लीटर क्या है?

रिपोर्ट्स के अनुसार जिस 50– 55 रुपए प्रति लीटर कीमत का जिक्र किया जा रहा है, वह दरअसल रिफाइनरी का एक्सपोर्ट (FOB) या bulk प्राइस होता है। इसका मतलब यह है कि यह कीमत उस स्तर की है जब तेल रिफाइनरी से सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदार को बेचा जाता है। इस कीमत में स्थानीय कर, ट्रांसपोर्ट लागत और डीलर मार्जिन शामिल नहीं होते। इसलिए इसे सीधे भारत के पेट्रोल पंप की कीमत से तुलना करना सही नहीं माना जाता।

भारत में पंप पर कीमत ज्यादा क्यों होती है

भारत में पेट्रोल और डीज़ल की रिटेल कीमत कई हिस्सों से मिलकर बनती है। इसमें शामिल हैं

  • रिफाइनरी या बेस प्राइस

  • केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी

  • राज्य सरकार का VAT

  • रोड सेस और अन्य शुल्क

  • ट्रांसपोर्ट और डीलर मार्जिन

ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़ों के अनुसार भारत में पेट्रोल-डीज़ल की अंतिम कीमत का लगभग 45–55% हिस्सा विभिन्न टैक्स के रूप में सरकारों को जाता है। यही कारण है कि रिफाइनरी से निकलने वाली कीमत और पेट्रोल पंप पर दिखने वाली कीमत में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

बांग्लादेश में भी टैक्स के बाद बढ़ती है कीमत

भारत से बांग्लादेश को डीज़ल निर्यात व्यापारिक समझौतों के तहत किया जाता है। दोनों देशों के बीच इसके लिए इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन जैसी परियोजनाएं भी बनाई गई हैं, जिससे भारत के नुमालीगढ़ रिफाइनरी से बांग्लादेश तक डीज़ल पहुंचाया जाता है। लेकिन बांग्लादेश में भी यह डीज़ल ₹51 प्रति लीटर में नहीं बिकता। वहां अपनी टैक्स व्यवस्था, ट्रांसपोर्ट लागत और वितरण मार्जिन जोड़ने के बाद खुदरा कीमत काफी अधिक हो जाती है।

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सोशल मीडिया पर भ्रम क्यों फैलता है

ईंधन की कीमतों पर अक्सर दो अलग-अलग स्तर की कीमतों की तुलना कर दी जाती है रिफाइनरी या एक्सपोर्ट प्राइस (टैक्स-फ्री), रिटेल पंप प्राइस (टैक्स और अन्य लागत सहित) जब इन दोनों की तुलना की जाती है तो ऐसा लगता है कि भारत अपने नागरिकों से ज्यादा और दूसरे देश से कम कीमत ले रहा है, जबकि वास्तविकता में यह अलग-अलग मूल्य स्तर होते हैं।

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