भारतीय स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकेंड में पूरी कर नया इतिहास रच दिया। पहली बार किसी भारतीय ने 10.10 सेकेंड से कम समय में रेस पूरी की है।
रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में शनिवार का दिन भारतीय एथलेटिक्स के लिए यादगार बन गया। पंजाब के स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकेंड में पूरी कर नया नेशनल रिकॉर्ड बना दिया। इसके साथ ही वह 10.10 सेकेंड की बाधा तोड़ने वाले पहले भारतीय धावक बन गए। फिनिश लाइन पार करते ही गुरिंदरवीर का जोश देखने लायक था। उन्होंने ट्रैक पर अपना बिब नंबर उतार दिया और जूते फेंककर जीत का जश्न मनाया।
यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं था। यह भारतीय स्प्रिंटिंग की सोच बदलने वाला पल माना जा रहा है। रेस के बाद गुरिंदरवीर ने कहा कि अक्सर लोगों का मानना था कि भारतीयों के पास 100 मीटर स्प्रिंट के लिए जरूरी जीन नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह इस सोच को गलत साबित करना चाहते थे और यह सिर्फ शुरुआत है।
एशिया के सबसे तेज धावकों में शामिल हुए गुरिंदरवीर
10.09 सेकेंड की टाइमिंग के साथ गुरिंदरवीर इस सीजन में एशिया के दूसरे सबसे तेज धावक बन गए हैं। उनसे आगे सिर्फ जापान के फुकुतो कोमुरो हैं, जिन्होंने 10.08 सेकेंड का समय निकाला था। गुरिंदरवीर ने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तय क्वालिफिकेशन मार्क 10.16 सेकेंड को भी आसानी से पार कर लिया। इससे भारतीय एथलेटिक्स को आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए नई उम्मीद मिली है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर इसी रफ्तार से प्रदर्शन जारी रहा तो भारत पहली बार वैश्विक स्प्रिंटिंग सर्किट में गंभीर चुनौती पेश कर सकता है।
एक दिन में तीन बार टूटा नेशनल रिकॉर्ड
इस प्रतियोगिता की सबसे खास बात रही कि नेशनल रिकॉर्ड एक ही दिन में तीन बार टूटा। शुक्रवार को पहले सेमीफाइनल में गुरिंदरवीर ने 10.17 सेकेंड का समय निकालकर रिकॉर्ड अपने नाम किया। इसके सिर्फ पांच मिनट बाद ओडिशा के अनिमेष कुजूर ने दूसरे सेमीफाइनल में 10.15 सेकेंड दौड़कर रिकॉर्ड वापस हासिल कर लिया। लेकिन फाइनल में गुरिंदरवीर ने दोनों से आगे निकलते हुए 10.09 सेकेंड की ऐतिहासिक दौड़ लगा दी। यह मुकाबला भारतीय एथलेटिक्स के लिए नई प्रतिद्वंद्विता और नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है।
फाइनल में अनिमेष को पीछे छोड़ बनाया दबदबा
फाइनल रेस में गुरिंदरवीर पूरी तरह नियंत्रण में दिखाई दिए। उन्होंने अनिमेष कुजूर से 0.11 सेकेंड तेज दौड़ लगाई और करीब दो फीट आगे रहते हुए फिनिश लाइन पार की। रिलायंस फाउंडेशन के प्रणव गुरव 10.29 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे। रेस के बाद गुरिंदरवीर ने अपनी सफलता का श्रेय ट्रेनिंग और मानसिक मजबूती को दिया। उन्होंने कहा कि आखिरी समय में शरीर से ज्यादा दिमाग काम करता है। जो मानसिक रूप से मजबूत रहता है वही जीतता है। उन्होंने अपनी कमजोरियों पर लगातार काम करने और स्ट्रेंथ बढ़ाने की बात भी कही।
भारतीय स्प्रिंटिंग की तुलना अब दुनिया से होने लगी
100 मीटर दौड़ को लंबे समय से दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित ट्रैक इवेंट माना जाता है। इस स्पर्धा में जमैका के Usain Bolt का 9.58 सेकेंड का वर्ल्ड रिकॉर्ड अब भी कायम है, जो उन्होंने 2009 वर्ल्ड चैंपियनशिप में बनाया था। ओलिंपिक इतिहास में भी 100 मीटर स्पर्धा पर लंबे समय तक अश्वेत एथलीटों का दबदबा रहा है। ऐसे में गुरिंदरवीर का प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए मानसिक बाधाएं तोड़ने वाला माना जा रहा है। भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह संदेश भी बड़ा है कि अब स्प्रिंटिंग में सिर्फ भागीदारी नहीं, बल्कि रिकॉर्ड और मेडल की बात होने लगी है।
400 मीटर में विशाल ने भी रचा इतिहास
रांची में सिर्फ 100 मीटर ही नहीं, 400 मीटर दौड़ में भी नया इतिहास बना। भारतीय धावक विशाल ने 44.98 सेकेंड में रेस पूरी कर अपना ही नेशनल रिकॉर्ड तोड़ दिया। वे 45 सेकेंड से कम समय में 400 मीटर दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। उनकी यह टाइमिंग इस सीजन में एशिया की सबसे तेज टाइमिंग भी है। तमिलनाडु के राजेश रमेश दूसरे और उत्तर प्रदेश के जय कुमार तीसरे स्थान पर रहे। लगातार टूटते रिकॉर्ड यह संकेत दे रहे हैं कि भारतीय एथलेटिक्स अब सिर्फ संभावनाओं की नहीं, बल्कि प्रदर्शन की कहानी लिख रहा है।