मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पदस्थ 70 हजार से अधिक शिक्षकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय ने शिक्षक पात्रता परीक्षा TET की अनिवार्यता में फिलहाल छ
MP TET Controversy: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पदस्थ 70 हजार से अधिक शिक्षकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय ने शिक्षक पात्रता परीक्षा TET की अनिवार्यता में फिलहाल छूट दे दी है। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले पर जब तक अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक शिक्षकों के लिए TET की परीक्षा देना पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका
प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने TET की अनिवार्यता से अपने शिक्षकों को स्थायी छूट दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दोबारा याचिका दायर की है। विभाग का मानना है कि मध्य प्रदेश की अपनी एक स्वतंत्र और पारदर्शी चयन व्यवस्था थी, जिसके तहत इन शिक्षकों की भर्ती की गई थी। इसलिए इन्हें अलग से TET पास करने के नियम से बाहर रखा जाना चाहिए।
70 हजार शिक्षकों पर था संकट
वर्ष 2005 से 2009 के दौरान व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की चयन प्रक्रिया के माध्यम से प्रदेश भर में 70 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। ये शिक्षक पिछले कई वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय राज्य सरकार के पक्ष में आता है, तो इन सभी शिक्षकों को भविष्य में भी TET देने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
शिक्षकों को छूट मिलनी चाहिए : DPI
लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारी अभिषेक सिंह ने किया है कि प्रदेश की तात्कालिक चयन व्यवस्था के आधार पर नियुक्त हुए शिक्षकों को राहत दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट में पैरवी जारी है और तब तक शिक्षकों पर किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाया जाएगा।