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हम्पी और दिव्या का पहला गेम ड्रॉ, इतिहास रचने की ओर दो भारतीय खिलाड़ी

हम्पी और दिव्या का पहला गेम ड्रॉ, इतिहास रचने की ओर दो भारतीय खिलाड़ी

हम्पी और दिव्या का पहला गेम ड्रॉ इतिहास रचने की ओर दो भारतीय खिलाड़ी

FIDE Women's World Cup 2025: FIDE विमेंस वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में इतिहास रच गया है। जॉर्जिया के बटुमी में खेले जा रहे पहले गेम में भारत की कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख के बीच मुकाबला ड्रॉ रहा। यह पहली बार है जब इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के फाइनल में दो भारतीय खिलाड़ी आमने-सामने हैं।

दबाव में दिखीं दिव्या

फाइनल के पहले मुकाबले में दिव्या देशमुख ने आक्रामक शुरुआत की। 25 चालों के भीतर जीत की स्थिति बनाने का प्रयास किया। अनुभवी कोनेरू हम्पी ने धैर्य नहीं खोया और दिव्या की कुछ छोटी-छोटी गलतियों का सटीक फायदा उठाकर मुकाबले को ड्रॉ की ओर मोड़ दिया। अब दूसरा गेम रविवार को खेला जाएगा, जिसमें हम्पी को सफेद मोहरे मिलेंगे। यदि यह मुकाबला भी बराबरी पर रहा, तो विजेता का निर्धारण टाईब्रेकर में कम समय वाली बाजियों के जरिए किया जाएगा।

हम्पी ने संभाला मोर्चा

वर्ल्ड रैपिड चैंपियन कोनेरू हम्पी को इस ड्रॉ के बावजूद मुकाबले में बढ़त का दावेदार माना जा रहा है, क्योंकि पहले गेम में उन्होंने काले मोहरों से खेलते हुए संतुलन बनाए रखा। अब दो गेम के इस क्लासिकल फॉर्मेट में अंतिम मुकाबले में उन्हें सफेद मोहरों से खेलने का फायदा मिलेगा, जिससे उनकी स्थिति और भी मजबूत मानी जा रही है। अनुभवी हम्पी के पास अब फाइनल पर निर्णायक बढ़त लेने का सुनहरा मौका है।

सेमीफाइनल में कोनेरू हम्पी ने चीन की मजबूत ग्रैंडमास्टर टिंगजी लेई को टाईब्रेकर में हराकर फाइनल में जगह बनाई। शुरुआती दो क्लासिकल गेम ड्रॉ रहे, जिसके बाद गुरुवार को टाईब्रेकर खेला गया। टाईब्रेकर की पहली बाजी में लेई ने बढ़त बनाई, लेकिन हम्पी ने दूसरी बाजी में दबाव झेलते हुए शानदार वापसी की और स्कोर बराबर कर दिया।

तीसरे सेट में हम्पी ने सफेद मोहरों से पहला गेम जीतकर बढ़त बनाई और फिर अगली बाजी भी जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। फाइनल में पहुंचने के लिए उन्हें केवल एक ड्रॉ की जरूरत थी, फिर भी उन्होंने आक्रामक खेल दिखाते हुए जीत दर्ज की।

19 वर्षीय दिव्या देशमुख ने सेमीफाइनल में पूर्व विश्व चैंपियन तान झोंग्यी को 1.5-0.5 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। पहले गेम में सफेद मोहरों से खेलते हुए उन्होंने 101 चालों तक चले मुकाबले में जबरदस्त नियंत्रण और मानसिक मजबूती दिखाई। मध्य खेल में लगातार दबाव बनाकर उन्होंने झोंग्यी को गलतियां करने पर मजबूर किया। क्वीन की अदला-बदली के बाद भी दिव्या की स्थिति बेहतर रही। झोंग्यी की समय की कमी में की गई चूक ने दिव्या को दो प्यादों की निर्णायक बढ़त दिलाई।

ड्रॉ से किया जीत का रास्ता साफ

दूसरे गेम में दिव्या ने काले मोहरों से संतुलित रणनीति अपनाई और मैच ड्रॉ कराया। झोंग्यी ने ‘क्वीन्स गैम्बिट डिक्लाइन्ड’ ओपनिंग से शुरुआत की, लेकिन दिव्या ने सटीक जवाबी चालों और मोहरों की अदला-बदली के साथ संतुलन बनाए रखा। अंत में जब दोनों के पास बराबर संख्या में प्यादे और रूक बचे, तो मुकाबला स्वाभाविक रूप से ड्रॉ की ओर बढ़ गया।

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