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Modi Leadership and India Economic Growth

वैश्विक संकट के दौर में मोदी का दूरदर्शी नेतृत्व

वैश्विक संकट और युद्ध के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक स्थिरता, आत्मनिर्भरता और तेज विकास का नया मॉडल पेश किया है।


वैश्विक संकट के दौर में मोदी का दूरदर्शी नेतृत्व

लाल सिंह आर्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की GDP में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह केवल आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति, वैश्विक विश्वास और नीतिगत स्थिरता का प्रमाण है। यदि कांग्रेस शासन के अंतिम वर्षों से तुलना की जाए, तो अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। उस समय देश महंगाई, भ्रष्टाचार और नीतिगत अस्पष्टता से जूझ रहा था। भारत को 'Fragile Five' देशों में गिना जाने लगा था। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक सुधारों, डिजिटल पारदर्शिता और निर्णायक नीतियों के माध्यम से वैश्विक निवेशकों का विश्वास पुनः अर्जित किया है। आज भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में पहचाना जा रहा है।

पूरी दुनिया इस समय अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं ने अनेक देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है। ऐसे कठिन समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व भारत ही नहीं, बल्कि विश्व समुदाय के लिए भी स्थिरता और दूरदर्शिता का प्रतीक बनकर उभरा है।प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देशवासियों से ऊर्जा बचत, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, अनावश्यक विदेशी खर्चों में कटौती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील केवल आर्थिक सलाह नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में जनभागीदारी का अभियान है। यह वही नेतृत्व क्षमता है, जो संकट आने के बाद नहीं, बल्कि उसकी आहट सुनकर ही राष्ट्र को तैयार करती है।

आज दुनिया के कई विकसित देश ऊर्जा संकट और महंगाई से जूझ रहे हैं। यूरोप में महंगाई बढ़ रही है, अमेरिका में ब्याज दरों का दबाव बना हुआ है और कई एशियाई अर्थव्यवस्थाएं विदेशी मुद्रा संकट से परेशान हैं। ऐसे समय में भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आर्थिक स्थिरता का नया मॉडल प्रस्तुत किया है।वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली थी, तब भारत कई आर्थिक चुनौतियों से घिरा हुआ था। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की GDP में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह केवल आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति, वैश्विक विश्वास और नीतिगत स्थिरता का प्रमाण है। यदि कांग्रेस शासन के अंतिम वर्षों से तुलना की जाए, तो अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। उस समय देश महंगाई, भ्रष्टाचार और नीतिगत अस्पष्टता से जूझ रहा था। भारत को 'Fragile Five' देशों में गिना जाने लगा था। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक सुधारों, डिजिटल पारदर्शिता और निर्णायक नीतियों के माध्यम से वैश्विक निवेशकों का विश्वास पुनः अर्जित किया है।

आज भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में पहचाना जा रहा है। कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती के साथ प्रदर्शन किया है। विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है और भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।'Make in India', 'Startup India', 'Digital India' और 'PLI' जैसी योजनाओं ने भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भारत ने नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है। कभी भारत मोबाइल फोन का बड़ा आयातक था, जबकि आज वह प्रमुख निर्माण देशों में शामिल हो चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को आर्थिक परिवर्तन का आधार बनाया। एक्सप्रेसवे, वंदे भारत ट्रेनें, नए एयरपोर्ट, मेट्रो नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार ने भारत की विकास गति को नई ऊर्जा दी है। रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर के माध्यम से सरकार ने रोजगार और औद्योगिक विकास को मजबूती प्रदान की है।महंगाई नियंत्रण के क्षेत्र में भी मोदी सरकार ने अनेक निर्णायक कदम उठाए हैं। कोविड काल और वैश्विक युद्धों के कारण पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी, लेकिन भारत ने तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति बनाए रखी। सरकार ने गरीबों के लिए मुफ्त राशन योजना जारी रखी, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया और आर्थिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेड इन इंडिया' पर दिया गया बल आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। यदि भारत का नागरिक विदेशी उत्पादों की बजाय भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देता है, तो घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी, रोजगार बढ़ेंगे और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। यही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक भावना है।प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा स्पष्ट किया है कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता को इतना मजबूत बनाना है कि भारत किसी भी वैश्विक संकट का सामना आत्मविश्वास से कर सके। रिकॉर्ड विदेशी निवेश, तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, डिजिटल क्रांति और स्टार्टअप संस्कृति इस बात का प्रमाण हैं कि मोदी सरकार की नीतियां केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि परिणाम देने वाली रणनीतियां हैं।

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रधानमंत्री मोदी की अपील केवल आर्थिक अनुशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय चेतना का भी संदेश देती है। कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन, ई-वाहनों का उपयोग और ऊर्जा की बचत जैसे कदम पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय संसाधनों की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने संतुलित विदेश नीति और मजबूत कूटनीति के माध्यम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की है। अनेक देश जहां ईंधन आपूर्ति संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत में स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। आज आवश्यकता नकारात्मक राजनीति की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय एकजुटता की है।

प्रधानमंत्री मोदी का एक और महत्वपूर्ण संदेश प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना है। रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से चुनौती है। प्राकृतिक खेती किसानों की लागत कम करने के साथ-साथ मिट्टी और पर्यावरण की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नेतृत्व से यह सिद्ध किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति, स्पष्ट नीति और जनसहभागिता के माध्यम से किसी भी संकट को अवसर में बदला जा सकता है। आज जब दुनिया युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट से जूझ रही है, तब भारत स्थिरता, विकास और आत्मविश्वास का नया अध्याय लिख रहा है। यह नया भारत है आत्मनिर्भर भारत, सक्षम भारत और विश्व के भविष्य का नेतृत्व करने वाला भारत।

 

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