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पद्मिनी एकादशी की तारीख को लेकर क्यों बना भ्रम? जानिए 27 मई को ही क्यों रखा जाएगा व्रत

पद्मिनी एकादशी 2026 की सही तारीख को लेकर श्रद्धालुओं में भ्रम बना है। जानिए 27 मई को व्रत रखने और 28 मई को पारण करने का सही समय और धार्मिक महत्व।


पद्मिनी एकादशी की तारीख को लेकर क्यों बना भ्रम जानिए 27 मई को ही क्यों रखा जाएगा व्रत

Religious News |

पद्मिनी एकादशी की तारीख को लेकर इस बार श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई लोग 26 मई को व्रत मान रहे हैं, जबकि वैष्णव परंपरा और पंचांग गणना के आधार पर 27 मई 2026 को व्रत रखा जाएगा। अधिक मास में आने वाली यह एकादशी धार्मिक दृष्टि से बेहद खास मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और उपवास करने से कई गुना पुण्यफल मिलता है। यही वजह है कि देशभर के मंदिरों और वैष्णव संतों के बीच इसकी तिथि को लेकर चर्चा तेज रही।

दिल्ली के इस्कॉन मंदिर से लेकर अयोध्या के वैष्णव संतों तक, ज्यादातर धार्मिक संस्थानों ने 27 मई, बुधवार को पद्मिनी एकादशी व्रत रखने का निर्णय माना है। व्रत का पारण 28 मई को किया जाएगा।

पद्मिनी एकादशी पर क्यों बना कन्फ्यूजन

इस बार एकादशी और द्वादशी तिथि के समय को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी। पंचांग के अनुसार द्वादशी तिथि 27 मई सुबह 6 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर 28 मई सुबह 7 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं में एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के भीतर करना जरूरी माना गया है। इसी गणना के आधार पर वैष्णव परंपरा में 27 मई को व्रत रखना अधिक मान्य माना जा रहा है। मंदिरों और धार्मिक संगठनों ने भी श्रद्धालुओं को सही तिथि देखकर ही व्रत रखने की सलाह दी है, ताकि पारण और पूजा विधि में कोई त्रुटि न हो।

अधिक मास में बढ़ जाता है एकादशी का महत्व

ज्येष्ठ अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में इसे भगवान विष्णु का प्रिय मास माना गया है। ऐसे में इस दौरान आने वाली पद्मिनी एकादशी का महत्व सामान्य एकादशी से कहीं अधिक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान, जप और विष्णु पूजा करने से कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। तीर्थ स्थलों पर स्नान और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा भी इसी वजह से निभाई जाती है। वैष्णव परंपरा में यह भी माना जाता है कि अधिक मास में किए गए व्रत और पुण्य कर्म का फल कभी नष्ट नहीं होता। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस एकादशी का इंतजार करते हैं।

कब करें व्रत का पारण

पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण गुरुवार, 28 मई 2026 को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 7 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार व्रत तोड़ने के लिए सुबह का समय सबसे शुभ माना गया है। धार्मिक नियमों में दोपहर के समय पारण करने से बचने की सलाह दी जाती है। अगर किसी कारण सुबह पारण नहीं हो पाए, तो श्रद्धालुओं को दोपहर बाद ही व्रत खोलना चाहिए। इसे धार्मिक अनुशासन और व्रत की पूर्णता से जोड़कर देखा जाता है।

श्रद्धालुओं के लिए क्यों खास है यह व्रत

पद्मिनी एकादशी को सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म संयम और साधना का पर्व भी माना जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं और पूरे दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं। धार्मिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिक मास में आने वाली यह एकादशी मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भी जोड़ी जाती है। इसी वजह से देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

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