चैत्र नवरात्रि में मध्य प्रदेश के 10 प्रमुख देवी मंदिरों की विशेषता, इतिहास और आस्था से जुड़ी जानकारी। जानिए मैहर, उज्जैन, दतिया समेत प्रमुख शक्ति स्थलों के बारे में विस्तार से।
भोपाल: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होते ही मध्य प्रदेश के देवी मंदिरों में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। प्रदेश के प्रमुख शक्ति स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.मध्य प्रदेश को धार्मिक और आध्यात्मिक धरोहर के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो न केवल आस्था का केंद्र हैं, बल्कि इतिहास और चमत्कारों से भी जुड़े हुए हैं।
मां शारदा मंदिर, मैहर (सतना)
त्रिकूट पर्वत पर स्थित यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। 1063 सीढ़ियां चढ़कर या रोपवे से यहां पहुंचा जा सकता है। नवरात्रि में यहां विशाल मेला लगता है और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
श्री पीतांबरा पीठ, दतिया
मां बगलामुखी को समर्पित यह मंदिर शत्रु नाश और वाक सिद्धि के लिए प्रसिद्ध है। यहां विशेष यज्ञ और साधना की जाती है। इसे सिद्ध पीठ भी माना जाता है।
हरसिद्धि मंदिर, उज्जैन
उज्जैन का यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ मराठा वास्तुकला और दीपस्तंभों के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती की कोहनी गिरी थी। नवरात्रि में यहां भव्य सजावट और पूजा होती है।
मां चामुंडा मंदिर, देवास
देवास की टेकरी पर स्थित यह मंदिर शक्ति का प्रमुख केंद्र है। यहां मां चामुंडा और तुलजा भवानी के दर्शन के लिए भक्त पहाड़ी चढ़ते हैं।
कवलका माता मंदिर, रतलाम
लगभग 300 वर्ष पुराने इस मंदिर में एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है, जहां मां की मूर्ति को मदिरा का भोग लगाया जाता है। यह परंपरा भक्तों की गहरी आस्था को दर्शाती है।
विजयासन देवी मंदिर, सलकनपुर
सीहोर जिले में स्थित यह मंदिर 1000 फीट ऊंची पहाड़ी पर है। इसे विंध्यवासिनी देवी का स्वरूप माना जाता है। नवरात्रि में यहां विशेष भीड़ रहती है।
कालमाधव शक्तिपीठ, अमरकंटक
नर्मदा उद्गम स्थल के पास स्थित यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है। यहां प्रकृति और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
मांढरे की माता मंदिर, ग्वालियर
कैंसर पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर महाकाली स्वरूप को समर्पित है। इसे महाराजा जयाजीराव सिंधिया द्वारा स्थापित किया गया था।
कर्फ्यू वाली माता मंदिर, भोपाल
यह मंदिर एक ऐतिहासिक घटना के कारण प्रसिद्ध हुआ। 1981 में मूर्ति स्थापना के दौरान विवाद के चलते कर्फ्यू लगाना पड़ा था, जिसके बाद इसका नाम ‘कर्फ्यू वाली माता’ पड़ गया।