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UP Panchayat Election Update

UP पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट, OBC आयोग 6 महीने में देगा आरक्षण रिपोर्ट, ग्राम प्रधान बने प्रशासक

यूपी पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट आया है। ओबीसी आयोग छह महीने में आरक्षण पर रिपोर्ट देगा, वहीं ग्राम प्रधानों को फिलहाल प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


up पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट obc आयोग 6 महीने में देगा आरक्षण रिपोर्ट ग्राम प्रधान बने प्रशासक

UP Panchayat Chunav |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग ने साफ कर दिया है कि पंचायत आरक्षण पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने में करीब छह महीने का समय लग सकता है। आयोग के गठन के साथ ही काम की शुरुआत मंगलवार से कर दी गई है। इस दौरान जिलों के दौरे कर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का आकलन किया जाएगा। 

इसी बीच राज्य में ग्राम पंचायत व्यवस्था को लेकर भी नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिससे गांवों का संचालन फिलहाल नए मोड़ पर पहुंच गया है।

ओबीसी आयोग करेगा जमीनी आकलन

आयोग के अध्यक्ष राम औतार सिंह ने बताया कि टीम जिलों का भ्रमण करेगी और यह समझने की कोशिश करेगी कि किस क्षेत्र में कितना पिछड़ापन है और उसके अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व कितना मिला है। 20 मई को गठित इस पांच सदस्यीय आयोग का उद्देश्य त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर एक स्पष्ट रिपोर्ट तैयार करना है। आयोग को छह महीने का कार्यकाल दिया गया है और इसी अवधि में विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।

पंचायत चुनाव टलने की संभावना और बढ़ी

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पंचायत चुनाव अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकते हैं। 10 जून को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी, जिसके बाद चुनावी प्रक्रिया की अगली दिशा तय होगी। फिलहाल आयोग की रिपोर्ट के इंतजार ने चुनावी शेड्यूल को और आगे खिसका दिया है, जिससे ग्रामीण राजनीति में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

ग्राम प्रधान अब बने प्रशासक

प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। 27 मई से सभी निर्वतमान ग्राम प्रधान अब प्रशासक के रूप में काम करेंगे। यह जिम्मेदारी तब तक जारी रहेगी जब तक नए पंचायत चुनाव नहीं हो जाते या नई ग्राम पंचायत की पहली बैठक नहीं हो जाती। इस व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधान केवल रूटीन कार्य देखेंगे और कोई भी नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे।

नीति निर्णयों पर रहेगा प्रशासन का नियंत्रण

नई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी विशेष परिस्थिति में नीति से जुड़े निर्णय की आवश्यकता होगी तो प्रस्ताव पहले जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजा जाएगा। जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद ही कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकेगा। इसका उद्देश्य पंचायतों में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना बताया गया है। ग्रामीण विकास कार्य बाधित न हों, इसलिए यह अस्थायी व्यवस्था लागू की गई है, जिसे लेकर अलग-अलग राज्यों में पहले भी इसी तरह के मॉडल अपनाए जा चुके हैं।

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