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UP Govt No PUC No Fuel Rule from Oct

ईंधन बचाने को लेकर योगी सरकार का बड़ा प्लान तैयार; अब PUC के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल

उत्तर प्रदेश सरकार ने एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है। 1 अक्टूबर से बिना PUC पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा, कई अन्य सख्त कदम भी लागू होंगे।


ईंधन बचाने को लेकर योगी सरकार का बड़ा प्लान तैयार अब puc के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल

UP News |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आगामी 1 अक्टूबर से एनसीआर क्षेत्र के सभी 1,041 पेट्रोल पंपों पर ‘नो PUC, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू की जाएगी। यानी अब बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) के किसी भी वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा।

प्रदूषण पर 30 से 35 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण को 30 से 35 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए सभी विभागों को मिलकर तेज और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

लाखों पुराने वाहन होंगे बाहर

बैठक में सामने आया कि एनसीआर में 26 लाख से अधिक ऐसे वाहन चिन्हित किए गए हैं जो अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुके हैं। अब तक हजारों वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी जारी है।

ई-बसों और ग्रीन ट्रांसपोर्ट पर जोर

गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 975 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल 100 ई-बसें पहले से सड़कों पर दौड़ रही हैं। सरकार सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रही है।

औद्योगिक प्रदूषण पर रियल टाइम निगरानी

एनसीआर में 725 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान की गई है। इनमें से 613 उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लगाई जा चुकी है, जिन्हें सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जोड़ा गया है ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके।

धूल नियंत्रण के लिए हजारों करोड़ का प्रोजेक्ट

सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम करने के लिए 3,666 करोड़ रुपये की योजना पर काम चल रहा है। इसके तहत 1,792 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास और मशीनीकृत सफाई व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

निगरानी और तकनीक से कड़ा नियंत्रण

प्रदूषण नियंत्रण के लिए 43 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें से कई पहले से काम कर रहे हैं। निर्माण स्थलों और कचरा प्रबंधन पर GPS ट्रैकिंग और डिजिटल सिस्टम से निगरानी की जा रही है।

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