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Twisha Case Judge Arrest

ट्विशा केस में रिटायर जज गिरिबाला गिरफ्तार, 6 चोटें, चैट्स और जांच प्रभावित की आशंका ने पलटा पूरा मामला

ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर जज गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द होने के 17 घंटे बाद गिरफ्तारी हुई। हाईकोर्ट ने चोटों, व्हाट्सएप चैट्स और जांच प्रभावित होने की आशंका को अहम आधार माना।


ट्विशा केस में रिटायर जज गिरिबाला गिरफ्तार 6 चोटें चैट्स और जांच प्रभावित की आशंका ने पलटा पूरा मामला

भोपाल की मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा मौत मामले में हाईकोर्ट के फैसले ने जांच की दिशा पूरी तरह बदल दी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करते हुए साफ कहा कि मामले में कई गंभीर तथ्य पहली नजर में सामने आते हैं, जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने पर्याप्त गंभीरता से नहीं देखा। हाईकोर्ट के आदेश के करीब 17 घंटे बाद ही सीबीआई ने गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले बुधवार देर रात करीब 1 बजे हाईकोर्ट का विस्तृत आदेश जारी हुआ था। कोर्ट ने माना कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और आरोपी पक्ष द्वारा साक्ष्यों या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ट्रायल कोर्ट पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस देव नारायण मिश्रा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत ने केस डायरी, गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की गहराई से जांच किए बिना अग्रिम जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मुख्य रूप से बचाव पक्ष के दस्तावेजों पर भरोसा किया, जबकि रिकॉर्ड पर मौजूद कई तथ्य अलग कहानी बता रहे थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी बड़ा आधार

हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को बेहद अहम माना। अदालत ने कहा कि मौत भले फांसी से हुई हो, लेकिन शरीर पर छह एंटीमॉर्टम चोटें भी मिली थीं। इनमें हाथ, उंगली और सिर पर चोटों के निशान शामिल थे। एम्स की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ये चोटें शव उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं आई थीं। कोर्ट ने माना कि इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और ट्रायल कोर्ट ने इसकी गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

व्हाट्सएप चैट्स ने बढ़ाए शक

मामले में पेश व्हाट्सएप चैट्स ने भी अदालत का ध्यान खींचा। मृतका ने कथित तौर पर अपने परिवार को मैसेज में बताया था कि ससुराल पक्ष उसे “ड्रग्स एडिक्ट” समझता था और मानसिक दबाव बनाया जाता था। चैट्स में गर्भ में पल रहे बच्चे को लेकर भी विवाद का जिक्र था। अभियोजन पक्ष का दावा है कि पति और परिवार की ओर से गर्भपात का दबाव बनाया जा रहा था। हाईकोर्ट ने कहा कि इन चैट्स को केवल पति तक सीमित आरोप मानना गलत होगा। रिकॉर्ड से प्रथमदृष्टया सास की भूमिका भी सामने आती है।

जांच में सहयोग नहीं करने पर भी सवाल

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी गिरिबाला सिंह जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुईं। रिकॉर्ड के मुताबिक 13, 14, 20, 21 और 23 मई को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद जांच में सहयोग नहीं किया गया। अदालत ने इसे गंभीर परिस्थिति माना।

CCTV फुटेज और सबूत प्रभावित करने का आरोप

सीबीआई ने अदालत में दावा किया कि घटना से जुड़ी CCTV फुटेज के साथ छेड़छाड़ की आशंका है। जांच एजेंसी के मुताबिक DVR जब्त होने के बाद भी घटना के वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आए। अदालत ने माना कि जांच के दौरान साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पोस्टमार्टम के दौरान रिश्तेदारों की मौजूदगी पर सवाल

मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि पोस्टमार्टम के दौरान आरोपी पक्ष से जुड़े दो वरिष्ठ डॉक्टर मौके पर मौजूद थे। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि मामले की संवेदनशीलता और आरोपियों के प्रभावशाली बैकग्राउंड को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी हो सकती है।

दहेज एंगल पर भी हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यह तथ्य कि आरोपी पक्ष मृतका के खाते में पैसे भेजता था, इससे दहेज प्रताड़ना के आरोप स्वतः खत्म नहीं हो जाते। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि शादी में महंगे उपहार और दहेज दिए जाने के बावजूद ट्विशा पर अतिरिक्त दबाव बनाया जाता था।

गंभीर मामलों में जमानत पर कोर्ट का संदेश

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत कोई सामान्य अधिकार नहीं, बल्कि असाधारण राहत है। अदालत ने साफ कहा कि यदि ट्रायल कोर्ट महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी करे और जांच प्रभावित होने की आशंका हो, तो उच्च न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। ट्विशा शर्मा केस में भी अदालत ने इसी आधार पर जमानत रद्द कर गिरफ्तारी का रास्ता साफ किया।

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