विश्रामपुर थाने के बाहर कांग्रेस का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। टीएस सिंहदेव ने आमरण अनशन की चेतावनी दी, जबकि दीपक बैज भूख हड़ताल की तैयारी में हैं।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में विश्रामपुर का धरना अब सिर्फ स्थानीय विरोध नहीं रह गया है। सूरजपुर जिले के विश्रामपुर थाना के बाहर कांग्रेस नेताओं का प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विपक्ष और प्रशासन के बीच सीधी टकराव की स्थिति में पहुंच चुका है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर शाम 6 बजे तक प्रशासन ने कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो वे आमरण अनशन शुरू करेंगे। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज भी क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठने की तैयारी में हैं। धरना स्थल पर बढ़ती भीड़ और नेताओं की मौजूदगी ने इस आंदोलन को प्रदेश स्तर की राजनीतिक लड़ाई में बदल दिया है।
विश्रामपुर थाने के सामने बीती रात से माहौल पूरी तरह राजनीतिक गर्मी से भरा रहा। दरी पर बैठे कार्यकर्ता, लगातार लग रहे नारे और प्रशासन के खिलाफ बढ़ता आक्रोश साफ दिखा रहा था कि मामला अब सिर्फ एक एफआईआर या पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है।
नरेंद्र जैन मामले ने बढ़ाया राजनीतिक दबाव
पूरा विवाद नगर पंचायत चुनाव के दौरान सामने आए उस मामले से जुड़ा है जिसमें जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन पर आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। कांग्रेस लगातार इस कार्रवाई को वापस लेने की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने नरेंद्र जैन के घर पहुंचकर विवाद किया, लेकिन शिकायत के बावजूद पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया। इसी आरोप को कांग्रेस प्रशासनिक पक्षपात के तौर पर पेश कर रही है। यही वजह है कि कांग्रेस नेताओं ने इसे सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताना शुरू कर दिया है।
धरना स्थल पर पूरी रात डटे रहे नेता
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज 25 मई को बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ विश्रामपुर थाने पहुंचे थे। प्रशासन से बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो वहीं अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया गया। धरने की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीएस सिंहदेव रात करीब ढाई बजे तक धरना स्थल पर मौजूद रहे। मंगलवार सुबह वे फिर प्रदर्शन स्थल पहुंचे और कार्यकर्ताओं से लगातार चर्चा करते रहे। कांग्रेस इस आंदोलन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि विपक्ष अब पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई के मुद्दों पर सीधे सड़क की लड़ाई लड़ने के मूड में है।
सिंहदेव की चेतावनी ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किल
टीएस सिंहदेव ने भावुक अंदाज में कहा कि वे मंगलवार को सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं, लेकिन अगर न्याय नहीं मिला तो यही उपवास आमरण अनशन में बदल जाएगा। उनके इस बयान के बाद धरना स्थल का माहौल और ज्यादा गंभीर हो गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के भूख हड़ताल पर बैठने की घोषणा ने भी प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस इस मुद्दे को प्रदेशभर में कानून व्यवस्था और विपक्ष के साथ कथित भेदभाव के मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में है।
स्थानीय विवाद से प्रदेश राजनीति तक पहुंचा मामला
विश्रामपुर का यह आंदोलन अब स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश की राजनीति का बड़ा विषय बनता दिख रहा है। कांग्रेस इसे जनता की आवाज दबाने का मामला बता रही है, जबकि प्रशासन फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। धरना स्थल पर लगातार बढ़ती भीड़ यह संकेत दे रही है कि आने वाले घंटों में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है। अब सबसे ज्यादा नजर प्रशासन के अगले कदम और शाम 6 बजे के बाद कांग्रेस की रणनीति पर टिकी हुई है।