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Shridham Express Gets New LHB Coaches

श्रीधाम एक्सप्रेस में बड़ा बदलाव, 30 मई से लगेंगे नए LHB कोच; बढ़ेंगी बर्थ और सफर होगा ज्यादा सुरक्षित

जबलपुर-निजामुद्दीन श्रीधाम एक्सप्रेस अब नए LHB कोच के साथ चलेगी। 30 मई से लागू बदलाव के बाद ट्रेन में 1128 बर्थ उपलब्ध होंगी।


श्रीधाम एक्सप्रेस में बड़ा बदलाव 30 मई से लगेंगे नए lhb कोच बढ़ेंगी बर्थ और सफर होगा ज्यादा सुरक्षित 

पश्चिम मध्य रेलवे ने जबलपुर-निजामुद्दीन श्रीधाम एक्सप्रेस में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। अब यह ट्रेन नए एलएचबी (LHB) कोच के साथ चलाई जाएगी। रेलवे के मुताबिक यह नई व्यवस्था मई के अंत से लागू होगी, जिससे यात्रियों को ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।

नए रैक के लागू होने के बाद ट्रेन में कुल 1128 आरक्षित बर्थ उपलब्ध होंगी। इससे यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ेगी और लंबी वेटिंग की समस्या में राहत मिल सकती है।

30 मई से शुरू होगा नया संचालन

पश्चिम मध्य रेल भोपाल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने जानकारी दी कि गाड़ी संख्या 12192 जबलपुर-निजामुद्दीन श्रीधाम एक्सप्रेस 30 मई 2026 से जबलपुर से एलएचबी रैक के साथ रवाना होगी। वहीं गाड़ी संख्या 12191 निजामुद्दीन-जबलपुर श्रीधाम एक्सप्रेस 31 मई 2026 से निजामुद्दीन से नए एलएचबी कोच के साथ संचालित की जाएगी।

नए रैक में होंगे 22 कोच

रेलवे के अनुसार नए एलएचबी रैक में कुल 22 कोच लगाए जाएंगे। इसमें अलग-अलग श्रेणियों के डिब्बे शामिल रहेंगे। ट्रेन में प्रथम एसी, द्वितीय एसी, तृतीय एसी, थर्ड एसी इकॉनमी, स्लीपर और सामान्य श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे। इसके अलावा एसएलआरडी और जनरेटर कार भी जोड़ी गई हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस नई संरचना से ट्रेन की क्षमता और संचालन व्यवस्था दोनों बेहतर होंगी।

कितनी बढ़ेंगी बर्थ?

  • प्रथम एसी : 24 बर्थ

  • द्वितीय एसी : 104 बर्थ

  • तृतीय एसी : 360 बर्थ

  • थर्ड एसी इकॉनमी : 80 बर्थ

  • स्लीपर क्लास : 560 बर्थ

रेलवे का मानना है कि बर्थ संख्या बढ़ने से यात्रियों को टिकट मिलने में आसानी होगी।

क्या होते हैं LHB कोच?

एलएचबी कोच पारंपरिक आईसीएफ कोच की तुलना में अधिक आधुनिक और सुरक्षित माने जाते हैं। ये कोच जर्मन तकनीक पर आधारित होते हैं और हाई स्पीड पर बेहतर संतुलन बनाए रखते हैं। इन कोचों में झटके कम लगते हैं, आवाज कम होती है और दुर्घटना की स्थिति में डिब्बों के एक-दूसरे पर चढ़ने का खतरा भी कम रहता है। यही वजह है कि भारतीय रेलवे धीरे-धीरे कई प्रमुख ट्रेनों में एलएचबी कोच लगा रहा है।

 

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