मध्य प्रदेश में बाघ संरक्षण सफल होने के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी ने बड़ी चुनौती पेश की है। नेपाल, म्यांमार, चीन, बांग्लादेश से जुड़े तस्कर सक्रिय।
नेपाल से चीन तक फैला नेटवर्क, 57 वांटेड शिकारी अब भी गिरफ्त से बाहर
देश में सबसे अधिक बाघों वाले राज्य मध्य प्रदेश के जंगलों पर अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों की नजर बनी हुई है। बाघ संरक्षण में लगातार सफलता हासिल कर रहे प्रदेश के लिए अब संगठित शिकारी गिरोह बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। नेपाल, म्यांमार, चीन और बांग्लादेश से जुड़े 10 अंतरराष्ट्रीय तस्कर और शिकारी वर्षों से फरार हैं, जिनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस तक जारी किए जा चुके हैं।मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के अनुसार प्रदेश में शिकार और वन्यजीव तस्करी से जुड़े कुल 57 वांछित आरोपी सक्रिय नेटवर्क का हिस्सा हैं। इनमें 10 अंतरराष्ट्रीय, 20 राष्ट्रीय स्तर के और 27 राज्य स्तर के आरोपी शामिल हैं।
बाघों की बढ़ती संख्या के साथ बढ़ी तस्करों की दिलचस्पी
मध्य प्रदेश के कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा और पन्ना जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्व लंबे समय से शिकारियों के निशाने पर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बाघ की खाल, हड्डियां, दांत और पंजों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होने के कारण वन्यजीव अपराधी लगातार सक्रिय रहते हैं।बाघ संरक्षण की सफलता के बावजूद शिकार रोकना वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
2015 से लंबित हैं कई वारंट
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सबसे पुराने लंबित वारंट वर्ष 2015 के हैं। अंतरराष्ट्रीय आरोपियों में नेपाल और म्यांमार से जुड़े नेटवर्क सबसे अधिक सक्रिय पाए गए हैं। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के शिकारी गिरोहों की संलिप्तता सामने आई है।
अंतरराष्ट्रीय वांटेड आरोपियों का देशवार विवरण
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देश
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आरोपी
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नेपाल
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4
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म्यांमार
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3
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चीन
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2
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बांग्लादेश
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1
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कुल
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10
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राष्ट्रीय स्तर के वांटेड आरोपी
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राज्य
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आरोपी
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महाराष्ट्र
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5
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उत्तर प्रदेश
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4
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दिल्ली
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3
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पंजाब
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2
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गुजरात
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2
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असम
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1
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ओडिशा
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1
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अन्य
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2
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कुल
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20
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सिवनी, श्योपुर और कटनी सबसे संवेदनशील जिले
प्रदेश में चिह्नित वांटेड शिकारियों के मामलों में सिवनी, श्योपुर और कटनी जिले शीर्ष पर हैं। इन जिलों में सबसे अधिक फरार आरोपियों की पहचान की गई है।
जिला वार वांटेड आरोपी
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जिला
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संख्या
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सिवनी
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4
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श्योपुर
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4
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कटनी
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4
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भोपाल
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2
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भिंड
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2
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विदिशा
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1
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उज्जैन
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1
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छतरपुर
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1
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नर्मदापुरम
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1
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छिंदवाड़ा
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1
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रीवा
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1
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मुरैना
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1
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स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की बढ़ी सक्रियता
वन्यजीव अपराधों के खिलाफ कार्रवाई में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने हाल के वर्षों में कई बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों में रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर विदेशी एजेंसियों और संबंधित देशों से समन्वय किया जा रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मिजोरम के जामखानकाप निवासी थुम्पुई की ट्रांसफर याचिका खारिज कर दी। उस पर बाघों के अवैध शिकार और अंगों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी का आरोप है। यह मामला स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जा रहा है।
गिरफ्तारी से आगे बढ़कर दोषसिद्धि पर फोकस
वन विभाग का दावा है कि अब केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अदालत में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।मई 2026 में कटनी के कुख्यात शिकारी पूनमलाल पारधी की गिरफ्तारी और फरवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाघ शिकारी आदिन सिंह उर्फ कल्ला बावरिया को चार वर्ष की सजा मिलना इसी रणनीति की सफलता माना जा रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
वन्यजीव अपराधों के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ी चुनौती वर्षों पुराने मामलों के फरार आरोपियों को पकड़ना, विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंच बनाना है। बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी अब उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है जितना उनका संरक्षण।