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नई शिक्षा स्थानांतरण नीति जारी

अंततः शिक्षा विभाग की स्थानांतरण नीति हुई जारी, 8 जून से लागू होगी

मध्य प्रदेश सरकार ने नई शिक्षा स्थानांतरण नीति जारी की, जिसे 8 जून से लागू किया जाएगा। 15 दिवस के पश्चात भी पोर्टल नहीं हुआ अपडेट।


अंततः शिक्षा विभाग की स्थानांतरण नीति हुई जारी 8 जून से लागू होगी

 प्रमोद दुबे 

 भोपाल। लगभग 12 दिवस पूर्व सरकार की कैबिनेट की बैठक के अंतर्गत जारी किए गए आदेश के लगभग 15 दिवस पश्चात असमंजस ,भ्रम की स्थिति एवं तकनीकी खामियों के बीच स्कूल विभाग की शिक्षा नीति स्थानांतरण को आज जारी कर दिया गया । नवीन शिक्षा विभाग स्थानांतरण नीति वर्ष 2026 के अंतर्गत स्थानांतरण 8 जून से प्रारंभ होंगे एवं यह प्रक्रिया 15 जुलाई तक चलेगी । वहीं दूसरी और जिस स्थानांतरण नीति को शिक्षा विभाग में जारी किया है , एवं जिस पर संपूर्ण नीति आधारित है । उसका पोर्टल 15 दिवस पश्चात भी आवश्यक दिशा निर्देशों के क्रम में अभी तक अपडेट नहीं हो पाया है।

 एक बार पुनः प्रशासनिक स्थानांतरण को प्राथमिकता  

वर्ष 2024 एवं वर्ष 2025 के पश्चात एक बार फिर वर्ष 2026 में प्रशासनिक स्थानांतरण को प्रथम प्राथमिकता दी गई है । अर्थात मंत्रालय एवं मंत्री से लेकर लोक शिक्षण संचनालय उपरोक्त स्थानांतरण पर हावी रहेगा ।
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सबसे पहले प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे। इसके बाद रिक्त पदों के आधार पर स्वैच्छिक तबादलों की प्रक्रिया शुरू होगी। अंतर्जिला स्थानांतरण के लिए 8 से 15 जून तक आवेदन किए जा सकेंगे, जबकि जिला कैडर, संभाग और राज्य स्तर के स्थानांतरण के लिए 8 से 17 जून तक ऑनलाइन आवेदन का मौका मिलेगा । पूर्व में यह स्थानांतरण एक से 15 जून तक के लिए नियत किए गए थे । जिसमें 15 दिन का समय मिला था परंतु अब मात्र 8 दिन का समय दिया गया है ।

 स्थानांतरण में कर्मचारियों की प्राथमिकता तय  

स्वैच्छिक स्थानांतरण में प्राथमिकता क्रम भी तय कर दिया गया है। सबसे पहले मौका मिलेगा

  • 10वीं बोर्ड में 100 फीसदी परिणाम देने वाले स्कूलों के प्राचार्य और शैक्षणिक स्टाफ को।
  • सरप्लस महिला शिक्षकों को।
  • सरप्लस पुरुष शिक्षकों को।
  • गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों और उनके परिवार को।
  • पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थापना चाहने वाले कर्मचारियों को।
  • दिव्यांग शिक्षकों को।
  • विधवा, परित्यक्ता महिला और विधुर कर्मचारियों को।
  • राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को।
  • वरिष्ठता के आधार पर अन्य कर्मचारियों को।

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