मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड में पुलिस ने डॉक्टर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। छह मौतों के बाद जांच तेज हो गई है और अस्पताल मालिक की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जांच एजेंसियों ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। हादसे में छह लोगों की जान जाने के बाद अब जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर अस्पताल से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक डॉक्टर भी शामिल हैं।
इस कार्रवाई ने साफ संकेत दिया है कि प्रशासन अब केवल हादसे के कारणों की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने इस त्रासदी को और गंभीर तो नहीं बना दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कई स्तरों पर जांच कर रही है। अस्पताल मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में है और आने वाले दिनों में कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
गिरफ्तारी के बाद तेज हुई पूछताछ
सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के मुताबिक आईसीयू में तैनात डॉक्टर पंकज, एडमिन मैनेजर राजकुमार और मेंटेनेंस मैनेजर अजीत कुमार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में तीनों की भूमिका संदिग्ध नजर आई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था किस स्तर पर थी और आग लगने के बाद आपातकालीन प्रबंधन कैसे किया गया। गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि हादसे से जुड़े अहम तथ्य सामने आ सकें।
छह मौतों ने खड़े किए गंभीर सवाल
इस अग्निकांड में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 17 घायल मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है। कुछ घायलों की स्थिति अभी भी चिंताजनक बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग और धुएं ने अस्पताल के भीतर कुछ ही देर में हालात बिगाड़ दिए थे। मरीज, उनके परिजन और अस्पताल स्टाफ अचानक बने इस संकट से जूझते नजर आए। राहत और बचाव अभियान के दौरान कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन कुछ मरीज गंभीर रूप से झुलस गए।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
हादसे के बाद अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बहस तेज हो गई है। शुरुआती जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रबंधन स्तर पर लापरवाही की आशंका जताई गई है। इसी आधार पर पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या अस्पताल में आवश्यक सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन निकास और आग से बचाव की व्यवस्थाएं नियमों के अनुसार मौजूद थीं या नहीं।
अस्पताल प्रबंधन पर दर्ज हुई एफआईआर
ब्रह्मपुरा थाने में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत मामले की जांच कर रही है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने घायलों के उपचार को प्राथमिकता देने का दावा किया है, वहीं जांच एजेंसियों को हादसे के हर पहलू की विस्तृत पड़ताल के निर्देश दिए गए हैं।
मालिक की भूमिका पर भी नजर
जांच का फोकस अब केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि अस्पताल के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसलों में प्रबंधन की क्या भूमिका थी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अस्पताल मालिक की जिम्मेदारी या लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है। लेकिन अब तक की कार्रवाई ने संकेत दे दिए हैं कि इस मामले में जवाबदेही तय करने के लिए प्रशासन पीछे हटने वाला नहीं है।