मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी 87 लाख टन पार पहुंच गई है। सरकार 18 हजार करोड़ से अधिक भुगतान की तैयारी में है, जबकि कई जिलों में गुणवत्ता और परिवहन पर सवाल उठ रहे हैं।
मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का आंकड़ा 87 लाख टन के पार पहुंच गया है। 18 मई तक प्रदेश में 12 लाख से अधिक किसानों से 87.71 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। इसके बदले सरकार द्वारा 18,006 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान की तैयारी की गई है। हालांकि खरीदी के साथ-साथ परिवहन, गुणवत्ता परीक्षण और रिजेक्ट अनाज को लेकर कई जिलों में स्थिति चिंताजनक नजर आ रही है।
प्रदेश में सबसे अधिक 6.81 लाख मीट्रिक टन गेहूं सीहोर जिले में खरीदा गया। इसके बाद उज्जैन, रायसेन और विदिशा प्रमुख जिले रहे। भोपाल संभाग 24.62 लाख मीट्रिक टन खरीदी के साथ प्रदेश में शीर्ष पर बना हुआ है।
| संभाग |
प्रमुख जिले |
खरीदी मात्रा (मीट्रिक टन) |
भुगतान तैयार (करोड़ रुपये) |
ट्रांसपोर्ट प्रतिशत |
स्वीकृति प्रतिशत |
| भोपाल |
सीहोर, विदिशा, रायसेन |
24.62 लाख |
5578.58 |
90-96% |
85-94% |
| उज्जैन |
उज्जैन, देवास, शाजापुर |
20.23 लाख |
4341.50 |
83-98% |
77-96% |
| नर्मदापुरम |
नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल |
7.11 लाख |
1492.80 |
84-94% |
78-90% |
रिपोर्ट के अनुसार, कुल खरीदे गए गेहूं में से करीब 75.95 लाख मीट्रिक टन का परिवहन हुआ है, जो कुल खरीदी का लगभग 86.6 प्रतिशत है। वहीं 83.49 लाख मीट्रिक टन गेहूं गुणवत्ता जांच के लिए प्रस्तुत किया गया, जिसमें से 71.43 लाख मीट्रिक टन स्वीकार किया गया। करीब 27 हजार मीट्रिक टन गेहूं रिजेक्ट भी किया गया है।
जबलपुर और रीवा संभाग के कई जिलों में स्वीकृति प्रतिशत कम रहने से गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। कटनी में केवल 60 प्रतिशत तथा पन्ना में 52 प्रतिशत गेहूं स्वीकृत हुआ। वहीं रीवा संभाग के मऊगंज, सिंगरौली और सीधी जिलों में भी स्वीकृति दर 50 से 59 प्रतिशत के बीच रही।
| संभाग |
प्रमुख जिले |
खरीदी मात्रा (मीट्रिक टन) |
भुगतान तैयार (करोड़ रुपये) |
ट्रांसपोर्ट प्रतिशत |
स्वीकृति प्रतिशत |
| जबलपुर |
जबलपुर, सिवनी, कटनी |
9.91 लाख |
1841.34 |
60-94% |
54-90% |
| सागर |
सागर, दमोह, छतरपुर |
7.23 लाख |
1144.06 |
57-94% |
52-87% |
| ग्वालियर |
ग्वालियर, शिवपुरी, गुना |
3.66 लाख |
832.76 |
90-94% |
86-92% |
| रीवा |
रीवा, सतना, मैहर |
5.17 लाख |
644.78 |
46-68% |
37-59% |
| इंदौर |
इंदौर, धार, खंडवा |
7.17 लाख |
1608.75 |
85-99% |
80-99% |
| चंबल |
श्योपुर, भिंड, मुरैना |
1.96 लाख |
434.72 |
85-95% |
79-92% |
| शहडोल |
उमरिया, शहडोल, अनूपपुर |
61 हजार |
87.35 |
61-93% |
54-90% |
शीर्ष पांच जिले (खरीदी मात्रा में)
| रैंक |
जिला |
खरीदी मात्रा (मीट्रिक टन) |
भुगतान तैयार (करोड़ रुपये) |
| 1 |
सीहोर |
6,81,000 |
1629.45 करोड़ |
| 2 |
उज्जैन |
7,09,253 |
1397.89 करोड़ |
| 3 |
विदिशा |
5,32,990 |
1153.74 करोड़ |
| 4 |
रायसेन |
5,61,729 |
1211.36 करोड़ |
| 5 |
देवास |
4,50,840 |
904.51 करोड़ |
फिलहाल कोई शिकायत नहीं
प्रदेश में अब तक 12 लाख 10 हजार 785 किसानों से 87 लाख 71 हजार 485 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। स्लॉट बुकिंग को लेकर फिलहाल विभाग के पास कोई शिकायत नहीं पहुंची है। इसके बावजूद सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
दूसरी ओर, इंदौर संभाग ने गुणवत्ता और परिवहन दोनों में बेहतर प्रदर्शन किया है। इंदौर जिले में 95 प्रतिशत परिवहन और 93 प्रतिशत स्वीकृति दर्ज की गई। बड़वानी और बुरहानपुर जैसे जिलों में भी स्वीकृति दर 95 प्रतिशत से ऊपर रही।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 10 लाख से अधिक किसानों के भुगतान की प्रक्रिया तैयार की जा चुकी है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में गेहूं वेयरहाउस रसीद के रूप में लंबित है।
- कर्मवीर शर्मा, आयुक्त, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग