मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने नामांकन दाखिल कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में हुई इस प्रक्रिया के बाद राजनीतिक समीकरणों पर नई चर्चा शुरू हो
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा के उम्मीदवार तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने शनिवार को भोपाल स्थित विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद दोनों नेताओं के साथ मौजूद रहे, जिससे पार्टी ने एकजुटता और संगठनात्मक ताकत का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की। यह नामांकन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगा तार चर्चा बनी हुई है। कांग्रेस में कथित असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग की अटकलों के बीच भाजपा की रणनीति पर सबकी नजर टिकी हुई है।
नामांकन से पहले भाजपा ने दिखाया शक्ति प्रदर्शन
शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे भाजपा के दोनों उम्मीदवार वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के साथ विधानसभा पहुंचे। इससे पहले प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और दोनों उम्मीदवार पार्टी कार्यालय परिसर स्थित शिव एवं हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद पूरा दल विधानसभा के लिए रवाना हुआ। दरअसल, चुनावी प्रक्रिया के ऐसे अवसरों पर पार्टी नेतृत्व का एक साथ दिखाई देना राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जाता है। भाजपा ने इस मौके को संगठन की मजबूती प्रदर्शित करने के रूप में इस्तेमाल किया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्या कहा?
नामांकन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भाजपा के दोनों उम्मीदवारों का नामांकन सफलतापूर्वक दाखिल कर दिया गया है और इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और मध्य प्रदेश संगठनात्मक दृष्टि से देश के मजबूत राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी वर्गों के विकास और सेवा के लिए काम कर रही है। यही वजह है कि भाजपा इस चुनाव को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि संगठनात्मक शक्ति के प्रदर्शन के रूप में भी देख रही है।
उम्मीदवारों को लेकर भाजपा क्यों दिखा रही है भरोसा?
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भाजपा के घोषित उम्मीदवारों का समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी ने ऐसे नेताओं को मौका दिया है जिन्होंने लंबे समय तक जमीन पर रहकर संगठन के लिए काम किया है। उनके बयान से यह संकेत भी मिला कि भाजपा अपने उम्मीदवारों के अनुभव और संगठन से जुड़ाव को चुनाव में बड़ी ताकत मान रही है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी उत्साह का माहौल दिखाई दिया।
तीसरी सीट पर क्यों बढ़ी राजनीतिक दिलचस्पी?
अब समझिए कि राज्यसभा चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा तीसरी सीट को लेकर क्यों हो रही है। हाल के दिनों में कांग्रेस के भीतर असंतोष और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी हुई है। हालांकि अभी तक किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मतदान के दौरान अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आता है तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
फिलहाल भाजपा अपने दोनों उम्मीदवारों के नामांकन के बाद आत्मविश्वास में नजर आ रही है, जबकि विपक्षी खेमे की रणनीति पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट का समीकरण किस दिशा में जाता है और इसका प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।