मध्यप्रदेश में 2026 मानसून पर अल नीनो का असर, बारिश सामान्य से 8% कम रहने का अनुमान। किसानों पर पड़ सकता है असर, IMD ने जताई चिंता।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अल नीनो की भूमिका सामान्य तौर पर खलनायक की तरह रही है। इसके प्रभाव से मानसून की बारिश अनियमित और कम होती रही है। इससे खेती पर निर्भर अधिकांश आबादी सीधे तौर पर प्रभावित होती है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस साल मध्यप्रदेश में मानसून की बारिश में करीब 8 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है, जिसके चलते बारिश का आंकड़ा 863.88 मिलीमीटर तक सिमट सकता है। जबकि प्रदेश की सामान्य औसत बारिश 939.9 मिलीमीटर है। अल नीनो को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस सीजन में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है। 1980 से अब तक के अल नीनो वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि करीब 70 प्रतिशत मामलों में मानसूनी बारिश कम रही है। इस वर्ष लगभग 92 प्रतिशत बारिश का अनुमान जताया गया है। पिछले 13 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 7 वर्षों में मानसून की बारिश सामान्य से 10 प्रतिशत तक कम रही है, जबकि 3 वर्षों में यह 90 से 96 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई। जिन वर्षों में अल नीनो की सक्रियता के बावजूद बारिश सामान्य रही, उन वर्षों में भी वर्षा का वितरण असमान रहा, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
किसानों पर पड़ सकती है दोहरी मार
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सामान्य से कम बारिश का असर सिंचाई, खरीफ और रबी फसलों की बुवाई के रकबे पर पड़ सकता है। कम बारिश का असर न सिर्फ खरीफ फसलों पर पड़ता है, बल्कि सर्दियों में बोई जाने वाली रबी फसलों पर भी प्रभाव डालता है। बारिश के अभाव में मिट्टी में नमी कम हो जाती है और जलाशयों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता घट जाती है। ऐसी स्थिति में अनाज के कुल उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
क्या है अल नीनो
अल नीनो जलवायु से जुड़ी एक प्राकृतिक घटना है, जो समय-समय पर होती रहती है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इस तापमान वृद्धि के कारण हवाओं के चक्र में बदलाव आता है, जिससे दुनिया भर के मौसम के पैटर्न प्रभावित होते हैं।
बारिश के हिसाब से अल नीनो का असर (प्रतिशत में)
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1982 – 88.6%
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1986 – 84%
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1987 – 85.7%
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1991 – 98.6%
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1994 – 113%
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1997 – 100.2%
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2002 – 79.1%
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2004 – 87%
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2006 – 99.6%
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2015 – 87.3%
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2018 – 91%
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2023 – 95%
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2026 – 92% (अनुमानित)