इंदौर में आयोजित LAC ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फोरम में 15 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। CM मोहन यादव ने MP को निवेश का उभरता हब बताया। फार्मा, ऑटोमोबाइल और फूड प्रोसेसिंग में बड़े अवसरों पर चर्चा हुई।
इंदौर में शुक्रवार को आयोजित इंडिया-लैटिन अमेरिकन एंड कैरिबियन (LAC) ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फोरम-2026 ने मध्यप्रदेश को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय निवेश चर्चा के केंद्र में ला दिया। 15 देशों के प्रतिनिधि और 350 से अधिक निवेशकों की मौजूदगी में यह साफ संकेत मिला कि अब प्रदेश केवल घरेलू निवेश ही नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारियों की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। इस दौरान कई देशों के राजनयिक, उद्योग प्रतिनिधि और भारतीय कारोबारी शामिल हुए। खास बात यह रही कि इस मंच पर फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टरों में सीधे निवेश और साझेदारी के अवसरों पर चर्चा हुई।
इंदौर क्यों बना निवेश डिप्लोमेसी का नया केंद्र?
दरअसल, इंदौर को अब सिर्फ मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी नहीं, बल्कि एक “ग्लोबल बिजनेस कनेक्ट हब” के तौर पर पेश किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह शहर ऐतिहासिक रूप से व्यापार और संस्कृति का केंद्र रहा है और आज वही परंपरा आधुनिक निवेश के रूप में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि भारत और लैटिन अमेरिका के बीच केवल व्यापारिक दूरी है, लेकिन संस्कृति और मूल्यों में गहरी समानता है। यही वजह है कि दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। कार्यक्रम में 50 से ज्यादा प्रदेश की कंपनियों ने विदेशी प्रतिनिधियों के साथ बी-टू-बी और बी-टू-जी बैठकें कीं। इन बैठकों में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और फार्मा सप्लाई चेन जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
3,835 करोड़ के निर्यात के पीछे क्या है रणनीति?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंच से बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश का लैटिन अमेरिकी देशों के साथ निर्यात करीब 3,835 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो लगभग 19% की वृद्धि दर्शाता है।
यह ग्रोथ कैसे संभव हुई?
दरअसल, राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में उद्योग नीति, लॉजिस्टिक्स सुधार और सिंगल विंडो सिस्टम पर लगातार काम किया है। इसके साथ ही फार्मा और कृषि आधारित उत्पादों की वैश्विक मांग ने भी इस बढ़त को मजबूती दी है। ब्राजील, मैक्सिको, अर्जेंटीना और पेरू जैसे देशों में मध्यप्रदेश की दवाओं और कृषि उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
फार्मा, ऑटोमोबाइल और ग्रीन एनर्जी में बढ़ता भरोसा
इंदौर और पीथमपुर अब देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में गिने जा रहे हैं। यहां फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर की बड़ी यूनिट्स पहले से मौजूद हैं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी यहां निवेश की संभावनाएं तलाश रही हैं। सीएम ने कहा कि प्रदेश में 31 हजार मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता है, जिसमें 30% हिस्सा ग्रीन एनर्जी से आता है। यह पहल निवेशकों के लिए एक बड़ा भरोसा बन रही है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो ESG (Environment, Social, Governance) मानकों पर काम करती हैं। इसके अलावा 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क और मजबूत कनेक्टिविटी सिस्टम भी निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।
विदेशी प्रतिनिधियों की नजर में मध्यप्रदेश
फोरम में शामिल कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों की सराहना की। उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो गुआने अम्ब्रेला ने कहा कि भारत और विशेषकर मध्यप्रदेश, व्यापार के लिए तेजी से उभरता हुआ बाजार है। ग्लोबल इंडिया बिजनेस फोरम के अध्यक्ष ने भी इसे “डायनामिक स्टेट” बताया, जहां मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों में मजबूत अवसर मौजूद हैं।

ऐसे अंतरराष्ट्रीय निवेश फोरम का सीधा असर लंबे समय में रोजगार, छोटे उद्योगों और स्थानीय सप्लाई चेन पर दिखाई देता है। जैसे-जैसे विदेशी कंपनियां राज्य में यूनिट्स लगाएंगी, नए रोजगार के अवसर बनेंगे और स्थानीय MSME सेक्टर को भी बड़ा बाजार मिलेगा।फिलहाल, मध्यप्रदेश खुद को ग्लोबल निवेश मानचित्र पर मजबूत करने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा चुका है।