मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर 2800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। चालू वित्त वर्ष में राज्य का कुल कर्ज 9200 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
भोपाल। मध्यप्रदेश में मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज लेने की तैयारी में है। इस बार सरकार 2800 करोड़ रुपये का ऋण आरबीआई के जरिए जुटाने जा रही है। यह कर्ज दो अलग-अलग किस्तों में लिया जाएगा। इसमें 1600 करोड़ और 1200 करोड़ रुपये शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष में यह चौथी बार है जब राज्य सरकार ने उधारी का रास्ता अपनाया है। लगातार बढ़ते कर्ज के साथ इस वित्त वर्ष में राज्य का कुल उधारी आंकड़ा 9200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
आरबीआई के जरिए बॉन्ड से जुटाया जाएगा पैसा
राज्य सरकार यह राशि भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से सिक्योरिटी बॉन्ड जारी कर लेगी। दोनों ऋण मध्यप्रदेश राज्य विकास ऋण के तहत लिए जा रहे हैं। पहली किस्त 1600 करोड़ रुपये की होगी, जिस पर 7.64 प्रतिशत ब्याज दर तय की गई है। दूसरी किस्त 1200 करोड़ रुपये की होगी, जिस पर 7.83 प्रतिशत ब्याज देना होगा। आरबीआई की ई-कुबेर प्रणाली के जरिए इन सिक्योरिटीज की नीलामी की जाएगी और पूरी प्रक्रिया 27 मई 2026 तक पूरी होने की संभावना है।
लंबी अवधि के लिए लिया गया कर्ज
सरकार द्वारा लिया जा रहा पहला कर्ज 2034 तक चुकाया जाएगा, जबकि दूसरा कर्ज 2048 तक की अवधि के लिए है। दोनों ऋणों का भुगतान छह-छह महीने की किस्तों में अप्रैल और अक्टूबर में किया जाएगा। इससे राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय देनदारियां और बढ़ेंगी। वित्त विभाग के अनुसार, यह कर्ज राज्य की विकास परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
लगातार बढ़ रही उधारी की रफ्तार
इस वित्त वर्ष में राज्य सरकार ने अप्रैल से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया था, जबकि आमतौर पर यह प्रक्रिया मई से आगे बढ़ती है। अप्रैल में ही सरकार ने दो बार में 4600 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसके बाद मई में 1800 करोड़ रुपये और अब 2800 करोड़ रुपये की नई उधारी की जा रही है। लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर वित्तीय प्रबंधन और राजस्व संतुलन पर भी चर्चा तेज हो गई है।
किन योजनाओं में खर्च होगा पैसा
सरकार का कहना है कि इस बॉन्ड से मिलने वाली राशि का उपयोग विकास कार्यों में किया जाएगा। इसमें सिंचाई परियोजनाएं, ऊर्जा, कृषि और आधारभूत संरचना से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। राज्य के संशोधित अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में राजस्व प्राप्ति और राजस्व व्यय दोनों करीब 2.79 लाख करोड़ रुपये के आसपास रहने का अनुमान है। इसी बीच बढ़ते कर्ज के आंकड़े आने वाले समय में राज्य की वित्तीय रणनीति को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं।