कूनो में चीतों की बसाहट के बाद मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों की पुनर्स्थापना योजना ठंडी पड़ गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नया स्थान तय नहीं हो सका।
कूनो में चीतों के बसने के बाद अब तक नई जगह की तलाश शुरू नहीं
मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों की पुनर्स्थापना के प्रयास अब लगभग ठंडे बस्ते में चले गए हैं। यही वजह है कि शेरों के लिए राज्य में अब तक किसी दूसरे स्थान की पहचान नहीं हो सकी है। पहले एशियाई शेरों के लिए कूनो अभयारण्य को चिन्हित किया गया था, लेकिन बाद में इसे चीतों के लिए आरक्षित कर दिया गया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले एशियाई शेरों को मध्यप्रदेश में लाने के प्रयास 1996 से चल रहे थे, लेकिन अब यह योजना लगभग बंद हो चुकी है। वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने का हवाला देते हुए इस पर अधिकृत टिप्पणी से बच रहे हैं। फिलहाल, शेरों की बसाहट के लिए तैयार किए गए कूनो नेशनल पार्क में चीतों को बसाने के बाद से मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों की पुनर्स्थापना योजना पर विराम लग गया है। यही कारण है कि दो वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य में शेरों के लिए कोई नया उपयुक्त स्थान तलाश नहीं किया जा सका है।
गुजरात की आनाकानी बनी बड़ी वजह
मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों की पुनर्स्थापना में गुजरात सरकार की आनाकानी बड़ी बाधा बनकर सामने आई है। बताया जाता है कि गुजरात एशियाई शेरों पर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहता है। इसी कारण उसने 2013 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का भी पालन नहीं किया।इसके पीछे एक बड़ी वजह गिर के शेरों से जुड़ा पर्यटन कारोबार भी माना जाता है। दुनिया भर में गिर के शेरों की विशेष पहचान है और वहां का पर्यटन उद्योग काफी हद तक इन्हीं पर आधारित है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी थीं तीन समितियां
2013 में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद गिर के शेरों को कूनो में शिफ्ट करने की प्रक्रिया तय करने के लिए तीन समितियां बनाई गई थीं। इनमें ट्रांसलोकेशन कमेटी, एक्सपर्ट कमेटी और एपेक्स कमेटी शामिल थीं।हालांकि, इन समितियों की नियमित बैठकें नहीं हो पाने के कारण कोई ठोस निर्णय नहीं निकल सका। जानकारी के मुताबिक, ट्रांसलोकेशन से जुड़ी एक्सपर्ट कमेटी की आखिरी बैठक वर्ष 2016 में हुई थी। इसके बाद यह मामला लगभग ठहर गया।
फिलहाल चिड़ियाघरों तक सीमित हैं एशियाई शेर
मध्यप्रदेश में फिलहाल एशियाई शेर सिर्फ चिड़ियाघरों की शोभा बने हुए हैं। वन्यजीव प्राणी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत दो बाघों के बदले भोपाल के वन विहार में दो एशियाई शेर लाए गए थे। इसके अलावा दो और शेरों को लाने की प्रक्रिया अभी जारी है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) Samita Rajoura ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुपालन में विचाराधीन है, इसलिए इस विषय पर फिलहाल कुछ कहना उचित नहीं होगा।