Breaking News
  • स्वदेश के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ें और हर बड़ी खबर सबसे पहले पाएं।
  • YouTube: @SwadeshNews, Facebook: @DainikSwadesh, Instagram: @swadesh_news1, X: @DainikSwadesh

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश > भोपाल

Mohan Cabinet Decisions

Mohan Cabinet Decisions: मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले, UCC मंजूर और अब एक विवाह मान्य

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में आज भोपाल के जगदीशपुर में आयोजित हुई कैबिनेट की बैठक में UCC के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है।


mohan cabinet decisions मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले ucc मंजूर और अब एक विवाह मान्य

Mohan Cabinet Decisions: मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले, UCC मंजूर और अब एक विवाह मान्य |

Mohan Cabinet Decisions: मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने समान नागरिक संहिता UCC को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में आज भोपाल के जगदीशपुर में आयोजित हुई कैबिनेट की बैठक में UCC के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। सीएम मोहन ने कहा है कि भावी पीढ़ी भोपाल के वास्तविक इतिहास को समझे और उसे जाने, इसी को लेकर इस बार कैबिनेट की बैठक जगदीशपुर में आयोजित की गई है।  कैबिनेट से मिली हरी झंडी के बाद अब इस विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पटल पर पेश किया जाएगा।

मुस्लिम महिलाओं ने किया समर्थन

कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राम हो या रहीम, सरकार सभी को बराबरी का अधिकार देने जा रही है। उन्होंने बताया कि 22 मई 2026 को जब समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट को सार्वजनिक किया गया था, तब से अब तक प्रदेशभर से करीब 10 लाख लोगों ने अपने सुझाव भेजे है। जिसमें से 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने यूसीसी का समर्थन किया है, जबकि 40 प्रतिशत पुरुषों ने अपनी राय दी है।

कानून के पक्ष में 94% लोग 

सरकार द्वारा चलाए गए अभियान के तहत 3 करोड़ से अधिक SMS भेजे गए, जिसमें से 94 प्रतिशत नागरिकों ने माना कि यह कानून राज्य में लागू होना चाहिए। 

पूर्व जस्टिस की कमेटी ने तैयार किया ड्राफ्ट

आपको बता दें कि इस कानून को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में तैयार किया गया है। समिति द्वारा 27 अप्रैल 2026 से ड्राफ्ट पर काम करना शुरू किया था। इस दौरान 51 जिलों में बैठकें आयोजित कीं गई थी। ताकि समाज के हर वर्ग की आवाज को इस कानून में शामिल किया जा सके।

कांग्रेस से नही आया कोई सुझाव 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा की ड्राफ्ट को लेकर जब राजनीतिक दलों से राय मांगी गई, तो आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी जैसी पार्टियों के प्रतिनिधि अपने सुझाव देने आए थे, लेकिन कांग्रेस पार्टी से कोई भी सुझाव देने नहीं आया। सीएम मोहन ने तंज कसते हुए कहा कि अब उनका रुख वो खुद जानें, लेकिन हमारे लिए यह प्रदेश को आगे बढ़ाने का एक बेहतरीन मौका है।

विवाह और तलाक के कड़े प्रावधान 

मोनोगैमी अनिवार्य: यह कोड सभी धर्मों और समुदायों के लिए केवल एक ही शादी को कानूनी मान्यता देता है। कोई भी व्यक्ति अपने पहले जीवनसाथी के जीवित रहते या उससे कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकेगा।

विवाह की न्यूनतम आयु: शादी के लिए पुरुषों की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष अनिवार्य रूप से तय की गई है।

प्रतिबंधित रिश्तों पर रोक: बिना मर्जी और खून के रिश्तों या जब तक कि किसी विशेष समुदाय की लंबी परंपरा या रीति-रिवाज इसकी अनुमति न देते हों  के बीच विवाह को प्रतिबंधित किया गया है।

तलाक के नियम और महिलाओं को अधिकार

मौखिक तलाक गैर-कानूनी: मौखिक रूप से दिए जाने वाले तलाक जैसे तीन तलाक या स्थानीय स्तर पर होने वाली पंचायतों के अलगाव के फैसलों को पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया गया है। अब किसी भी विवाह का समापन केवल और केवल अदालत के ज़रिए, कानून में दिए गए स्पष्ट और वैधानिक आधारों पर ही हो सकेगा।

शादी रद्द कराने का नया अधिकार: मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए महिलाओं को यह विशेष अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी इस आधार पर शादी को अदालत के माध्यम से तुरंत रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है।

निकाह हलाला एक दंडनीय अपराध: तलाक के बाद यदि कोई जोड़ा दोबारा आपस में शादी करना चाहता है, तो इसके लिए 'निकाह हलाला' जैसी महिलाओं को नीचा दिखाने वाली या अपमानजनक शर्तों को मानना, उन्हें बढ़ावा देना या इसके लिए मजबूर करना अब एक गंभीर दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।

शादी और तलाक रजिस्ट्रेशन अनिवार्य 

नए कानून के तहत प्रदेश के हर नागरिक के लिए विवाह और तलाक दोनों का सरकारी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

Related to this topic: