मध्य प्रदेश में तीन नए जैव मंडल रिजर्व की घोषणा से बायोडायवर्सिटी संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। ये क्षेत्र विज्ञान और अनुसंधान के महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे।
मध्य प्रदेश में बायोस्फीयर रिजर्व (जैव मंडल रिजर्व) की संख्या आने वाले समय में तीन से बढ़कर छह हो सकती है। राज्य सरकार ने वन एवं जैव विविधता संरक्षण को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से तीन नए वन क्षेत्रों को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे प्रदेश को पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और इको-टूरिज्म के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की संभावना है।
वर्तमान में मध्य प्रदेश में तीन प्रमुख बायोस्फीयर रिजर्व हैं, जिनमें पचमढ़ी, पन्ना और अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व शामिल हैं। अब एप्को (एनवायरमेंटल प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन) ने बांधवगढ़, कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व को भी बायोस्फीयर रिजर्व घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे राज्य शासन के माध्यम से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा जा रहा है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार, आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन क्षेत्रों को यूनेस्को की विश्व बायोस्फीयर रिजर्व सूची में शामिल कराने का भी प्रयास किया जाएगा। ये क्षेत्र जैव विविधता, दुर्लभ वनस्पतियों, वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी संरक्षण के दृष्टिकोण से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
बायोस्फीयर रिजर्व बनने से होंगे कई फायदे
बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा मिलने से दुर्लभ वनस्पतियों, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को और मजबूती मिलेगी। साथ ही यह क्षेत्र वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित हो सकेंगे।इसके अलावा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पारंपरिक संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। केंद्र और राज्य सरकार से विशेष योजनाओं तथा बजट का लाभ भी प्राप्त हो सकेगा। यदि ये क्षेत्र यूनेस्को की सूची में शामिल होते हैं तो इनके विकास और संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
नए बायोस्फीयर रिजर्व बनने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को भी सीधा लाभ मिलेगा। इको-टूरिज्म के विस्तार से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय जीवनशैली को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल जल संरक्षण, जलवायु संतुलन और हरित क्षेत्र के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
देश में सबसे अधिक बायोस्फीयर रिजर्व वाला राज्य बन सकता है मध्य प्रदेश
वर्तमान में भारत में कुल 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं, जिनमें से तीन मध्य प्रदेश में स्थित हैं। यदि बांधवगढ़, कान्हा और पेंच को भी यह दर्जा मिल जाता है, तो मध्य प्रदेश देश का सबसे अधिक बायोस्फीयर रिजर्व वाला राज्य बन जाएगा।इससे प्रदेश की समृद्ध वन संपदा, बाघ, तेंदुआ, भालू, गिद्ध सहित अनेक दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण को और मजबूती मिलेगी।
रिपोर्ट में बताई गईं प्रमुख विशेषताएं
एप्को द्वारा तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि बांधवगढ़, कान्हा और पेंच के कोर तथा बफर क्षेत्रों में जैव विविधता अत्यंत समृद्ध है। यहां दुर्लभ वनस्पतियां और वन्यजीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। स्थानीय समुदाय और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलित संबंध भी इन क्षेत्रों की महत्वपूर्ण विशेषता है। रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान की भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उल्लेखनीय है कि कोर एरिया किसी भी बायोस्फीयर रिजर्व का सबसे संरक्षित भाग होता है, जहां मानवीय गतिविधियों को अत्यंत सीमित रखा जाता है ताकि प्राकृतिक पारिस्थितिकी सुरक्षित रह सके।