मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एमएसएमई दिवस पर छोटे उद्योगों को आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की रीढ़ बताया। 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार मिला, 1499 करोड़ का प्रोत्साहन दिया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि छोटे उद्योग ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की असली रीढ़ हैं। सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह बात शनिवार को रवींद्र भवन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग दिवस (एमएसएमई दिवस) पर 'सशक्त उद्यमी, समृद्ध मध्यप्रदेश समिट' को संबोधित करते हुए कही।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से लघु एवं मध्यम इकाइयों को 225.19 करोड़ रुपये, स्टार्ट-अप्स को 39 लाख रुपये तथा वृहद उद्योगों के लिए 1274 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की।डॉ. यादव ने बताया कि राज्य के 24 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में एक करोड़ 25 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है, जो प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता की सफलता का प्रमाण है।मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी उद्यमियों, स्टार्ट-अप क्रिएटर्स, कारीगरों एवं श्रमिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके परिश्रम, नवाचार और उद्यमशीलता से मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन के नए आयाम स्थापित कर रहा है। एमएसएमई क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत के साथ-साथ विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण की भी मजबूत आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से उद्योग और रोजगार का केंद्र बन रहा है। यदि वर्तमान गति बनी रही तो अगले पांच वर्षों में प्रदेश देश के तीन सबसे बड़े औद्योगिक राज्यों में शामिल हो सकता है।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रवींद्र भवन परिसर में आयोजित विशेष प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन कश्यप भी उपस्थित रहे।
महिलाएं चला रही हैं 4 लाख 41 हजार से अधिक उद्योग
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 4 लाख 41 हजार से अधिक इकाइयों का संचालन महिला उद्यमियों द्वारा किया जा रहा है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।उन्होंने बताया कि सरकार ने अगले ढाई वर्षों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 4500 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है। एमएसएमई डेवलपमेंट पॉलिसी के तहत उद्यमियों को 40 प्रतिशत तक तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को 60 प्रतिशत तक निवेश प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
विकास एवं गुणवत्ता सत्र में दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव
समिट के पहले सत्र में प्रदेश से आए उद्यमियों के लिए 'समृद्ध मध्यप्रदेश : हार्ट ऑफ इंडिया, हार्ट of ग्रोथ' थीम पर चर्चा की गई। इसके बाद दूसरे सत्र में प्रस्तुतिकरण, क्रेता-एमएसएमई संवाद और व्यावसायिक नेटवर्किंग बैठकें आयोजित हुईं।भारतीय मानक ब्यूरो के मोहम्मद रिजवान एवं मोहम्मद तौसीफ ने मानकीकरण, प्रमाणन और शुल्क रियायतों की जानकारी दी।भेल के विभागाध्यक्ष पंकज कुमार झा और प्रबंधक मीनाक्षी सिंह ने संस्थान की खरीद प्रक्रिया, वेंडर पंजीकरण व्यवस्था तथा एमएसएमई के लिए उपलब्ध खरीद अवसरों के बारे में जानकारी साझा की।रेसोनिया के सहायक उपाध्यक्ष दीपांकर बरगली ने कॉर्पोरेट वेंडर ऑनबोर्डिंग, खरीद प्रक्रिया और व्यावसायिक अवसरों पर प्रकाश डाला।वहीं, गेल इंडिया लिमिटेड के नवीन जमालमुडी ने वेंडर पंजीकरण, निविदा प्रक्रिया, तकनीकी योग्यता और आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकताओं से उद्यमियों को अवगत कराया।नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के विपुल जैन ने एनसीएल के साथ व्यवसाय करने और संस्थान की खरीद प्रक्रिया में भागीदारी संबंधी जानकारी दी। वहीं, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की पल्लवी मिश्रा ने विद्युत पारेषण क्षेत्र में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों की जानकारी साझा की।