IMD ने 2026 मानसून सीजन में सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश का अनुमान जताया है। अलनीनो के प्रभाव से मध्य भारत और कृषि क्षेत्रों में वर्षा घटने की आशंका, किसानों की बढ़ी चिंता।
अल नीनो की सक्रियता की आहट के साथ ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल डगमगाती नजर आ रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था की 'जीवनरेखा' कहे जाने वाला मानसून केरलम की धरती पर पहले से घोषित पूर्वानुमान की तुलना में कुछ विलंब से पहुंचेगा। मानसून ऋतु के दौरान पूरे भारत में सामान्य से 10 फीसदी कम, यानी 90 फीसदी बारिश होने की संभावना है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को जारी पूर्वानुमान में कहा है कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होगी। सबसे चिंता की बात यह है कि भारत के 'मानसून कोर जोन' में भी अपेक्षाकृत कम वर्षा होने की आशंका है। यह क्षेत्र देश के सर्वाधिक कृषि उत्पादन वाले इलाकों में शामिल है। इसमें मुख्य रूप से मध्य भारत के मैदानी क्षेत्र, जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के कुछ हिस्से शामिल हैं।
मानसून कोर जोन उस क्षेत्र को कहा जाता है, जहां मानसूनी हवाएं सबसे अधिक केंद्रित होती हैं। पिछले कुछ वर्षों में मानसून इस क्षेत्र से कुछ हद तक रूठा रहा था, हालांकि बीते दो-तीन वर्षों में यह फिर से अपने कोर जोन में केंद्रित हुआ था। इस वर्ष इसके दोबारा कमजोर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं।
IMD को संकेत मिले हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अल नीनो की परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं।
जरूरी जानकारी
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 1 और 2 जून को तथा विदर्भ में 2 जून को हल्की से मध्यम वर्षा, गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 29 से 31 मई के दौरान तथा विदर्भ में 29 मई से 1 जून तक गरज-चमक के साथ आंधी (50 से 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं तथा 70 किमी प्रति घंटा तक के झोंके) चलने की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 29, 31 मई और 1 जून को भारी वर्षा की संभावना है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 29 और 30 मई को तथा विदर्भ में 30 और 31 मई को ओलावृष्टि की संभावना है।
जून-सितंबर के दौरान बारिश का पूर्वानुमान
पूरे देश में जून से सितंबर के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा सामान्य के 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। इस प्रकार वर्ष 2026 के मानसून सीजन में देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की सबसे अधिक संभावना है। उत्तर-पूर्व भारत, मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य वर्षा का लगभग 94 प्रतिशत होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा सामान्य से कम रहने के संकेत हैं। जून 2026 के दौरान पूरे देश में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है। जून माह में उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों तथा मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर देश के अधिकांश भागों में मासिक वर्षा सामान्य से कम, यानी लगभग 92 प्रतिशत रहने की संभावना है। उत्तर-पूर्व भारत के कुछ क्षेत्रों, दक्षिणी प्रायद्वीप के पूर्वी हिस्सों, उनसे सटे पूर्व-मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों तथा पूर्वी भारत के कुछ चुनिंदा इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा होने का पूर्वानुमान है। जून 2026 के लिए मासिक वर्षा और तापमान के पूर्वानुमान के अनुसार, अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है।
फैक्ट फाइल
जून में देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। देश के अधिकांश क्षेत्रों में मासिक न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।