फर्जी न्यायालयीन आदेश मामले में हाईकोर्ट के निर्देश पर IAS संतोष वर्मा इंदौर के एमजी रोड थाने पहुंचे। जांच के लिए हस्ताक्षरों के नमूने लिए गए, फोरेंसिक जांच पर टिकी नजर।
इंदौर। चर्चित फर्जी न्यायालयीन आदेश प्रकरण में नामजद आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा उच्च न्यायालय के निर्देश पर इंदौर के एमजी रोड थाना पहुंचे, जहां उन्होंने जांच प्रक्रिया के तहत अपने हस्ताक्षरों का नमूना उपलब्ध कराया। संतोष वर्मा का नाम उस प्रकरण में सामने आया था जिसमें कथित तौर पर न्यायालय के फर्जी आदेशों के उपयोग का आरोप लगा था। इस मामले में पहले भी पुलिस जांच, गिरफ्तारी और न्यायिक कार्यवाही हो चुकी है। जांच एजेंसियां लंबे समय से दस्तावेजों की सत्यता और हस्ताक्षरों के मिलान से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने विवादित बयानों और फर्जी दस्तावेजों के आरोपों से घिरे आईएएस संतोष वर्मा पर प्रदेश सरकार ने कार्रवाई की थी। पहले उन्हें किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के उप सचिव पद से हटा दिया। वर्तमान में उन्हें बिना किसी विभाग और जिम्मेदारी के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) पूल में संलग्न कर दिया।
संतोष वर्मा के विवादों से जुड़ी जानकारी
- ब्राह्मण बेटियों पर टिप्पणी: उन्होंने आरक्षण के संदर्भ में एक कार्यक्रम में कहा था कि "एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण मिलने की शर्त तब तक मंजूर नहीं, जब तक कोई ब्राह्मण उनके बेटे को अपनी बेटी दान न कर दे।" इस बयान के बाद देश और प्रदेश भर के ब्राह्मण संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया।
- हाई कोर्ट पर आरोप: उन्होंने सिविल जज की परीक्षा के कट-ऑफ (Cut-off) अंकों को लेकर सीधे हाई कोर्ट पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि एससी/एसटी उम्मीदवारों को सिविल जज बनने से जानबूझकर रोका जा रहा है।
- 'हर घर से संतोष' का बयान: विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्होंने एक और बयान दिया कि "कितने संतोष वर्मा को मारोगे, अब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा।"
मिड-करियर ट्रेनिंग पर जाने से रोका
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आईएएस अवार्ड (पदोन्नति) प्राप्त करने और लंबित आपराधिक मामलों के कारण राज्य सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। उनके इन विवादित मामलों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें मसूरी में होने वाली मिड-करियर ट्रेनिंग (Mid-Career Training) पर जाने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया है।