गुजरात निकाय चुनाव में BJP ने सभी 15 नगर निगमों में जीत दर्ज की, लेकिन अहमदाबाद झड़प, बड़े चेहरों की हार और चौंकाने वाले नतीजों ने चुनाव को अलग मोड़ दे दिया।
गांधी नगर। गुजरात के निकाय चुनावों में BJP ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखा दी। 15 के 15 नगर निगमों में जीत दर्ज कर पार्टी ने शहरी वोटबैंक पर मजबूत पकड़ साबित की। 26 अप्रैल को हुई वोटिंग के बाद 28 अप्रैल को काउंटिंग शुरू हुई। 9992 सीटों पर हुए चुनाव में BJP ने 6161 सीटें जीत लीं। करीब 76% का स्ट्राइक रेट अपने आप में बड़ा संकेत है।
लेकिन इस जीत के बीच कुछ ऐसी घटनाएं और नतीजे भी सामने आए। इन घटनाओं ने चुनावी माहौल को एकतरफा नहीं रहने दिया।
आंकड़ों में भारी जीत, विपक्ष फिर पीछे
BJP ने नगर निगम से लेकर पंचायत स्तर तक बढ़त बनाई। कांग्रेस 1315 सीटों पर सिमट गई, जबकि अन्य दलों को सीमित सफलता मिली। आम आदमी पार्टी ने 380 सीटों का दावा किया, जो राज्य में उसकी एंट्री को दिखाता है। AIMIM को भी कुछ सीटों पर जीत मिली। यह नतीजे बताते हैं कि संगठन और ग्राउंड नेटवर्क के दम पर BJP अभी भी बाकी दलों से आगे है।
अहमदाबाद की झड़प ने बढ़ाई सियासी गर्मी
अहमदाबाद के एलडीएस कॉलेज काउंटिंग सेंटर के पास अचानक माहौल बिगड़ गया। यहां पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ। आरोप है कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं के साथ सख्ती दिखाई, यहां तक कि थप्पड़ मारने की बात भी सामने आई। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रशासनिक रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़े नाम हारे, आम चेहरे बने चर्चा
राजकोट में रविंद्र जड़ेजा की बहन नयनाबा जडेजा कांग्रेस टिकट पर चुनाव हार गईं। यह हार प्रतीकात्मक तौर पर बड़ी मानी जा रही है। वहीं, जामनगर में जेल में बंद उम्मीदवारों ने चुनाव जीतकर अलग तरह की बहस छेड़ दी। एक ओर बहुचराजी से चूड़ियां बेचने वाली महिला पार्षद बनीं। यह दिखाता है कि स्थानीय चुनावों में जमीन से जुड़े चेहरे भी जगह बना रहे हैं।
नए नगर निगमों में भी BJP का विस्तार
इस बार 9 नए नगर निगमों में पहली बार चुनाव हुए और BJP ने यहां भी जीत दर्ज की। आनंद, गांधीधाम, मेहसाणा, नवसारी जैसे इलाकों में जीत से साफ है कि पार्टी सिर्फ पुराने गढ़ नहीं बचा रही, बल्कि नए क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रही है। यह शहरी राजनीति में लंबे समय की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भारी मतदान, क्या संकेत मिला जनता से?
इस चुनाव में 4 करोड़ 18 लाख से ज्यादा मतदाताओं ने हिस्सा लिया। नगर निगमों में 55% से ज्यादा और पंचायत स्तर पर 65% से अधिक मतदान दर्ज हुआ। यह बताता है कि स्थानीय मुद्दों को लेकर लोगों में दिलचस्पी बनी हुई है। अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी भागीदारी के बावजूद क्या विपक्ष अपनी जमीन वापस बना पाएगा या BJP की बढ़त और मजबूत होगी।