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गौतम बुद्ध के शिष्यों के अवशेष मंगोलिया भेजे गए

सांची से मंगोलिया रवाना हुए बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अस्थि कलश

गौतम बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों को कड़ी सुरक्षा के बीच भोपाल से मंगोलिया के गंडन तेगचेनलिंग मठ में भेजा गया।


सांची से मंगोलिया रवाना हुए बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अस्थि कलश

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भोपाल एयरपोर्ट ले जाए गए अवशेष, 24 घंटे सुरक्षा घेरा

विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ सांची में संरक्षित भगवान गौतम बुद्ध के परम शिष्यों अर्हन्त सारिपुत्र और अर्हन्त महामोग्गलान के पवित्र अस्थि कलश गुरुवार को मंगोलिया के लिए रवाना किए गए। इन पवित्र अवशेषों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भोपाल एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से विशेष विमान द्वारा पहले दिल्ली और फिर मंगोलिया भेजा जाएगा।

बौद्ध मंत्रोच्चार के बीच निकाले गए पवित्र अवशेष

सुबह करीब 7 बजे चैतन्यगिरि विहार मंदिर के मुख्य तहखाने से 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में पवित्र अस्थि कलश बाहर निकाले गए। लगभग एक घंटे तक बौद्ध भिक्षुओं द्वारा मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना की गई। पूरे परिसर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

सांची में दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर

सुबह 9 बजे सशस्त्र सुरक्षा बलों ने पवित्र अवशेषों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद अस्थि कलशों को बुलेटप्रूफ और शॉक-प्रूफ विशेष बॉक्स में सील किया गया। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में इन्हें सड़क मार्ग से भोपाल एयरपोर्ट रवाना किया गया।

‘सोवरेन गारंटी’ प्रोटोकॉल के तहत पूरा मिशन

रायसेन एसडीएम मनीष शर्मा के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और केंद्र सरकार की तकनीकी टीम ने पहले ही अवशेषों का वैज्ञानिक परीक्षण, सत्यापन और नाप-तौल की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। यह पूरा मिशन ‘सोवरेन गारंटी’ प्रोटोकॉल के तहत संचालित किया जा रहा है।

मंगोलिया के प्रमुख बौद्ध मठ में होंगे दर्शन

मंगोलिया के गंडन तेगचेनलिंग मठ में इन पवित्र अस्थि कलशों को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा। वर्ष 1809 में स्थापित यह मठ मंगोलिया का प्रमुख बौद्ध केंद्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और बौद्ध अनुयायी दर्शन करने पहुंचेंगे।

24 घंटे सुरक्षा घेरे में रहते हैं पवित्र अवशेष

पवित्र अस्थि कलशों को राजकीय अतिथि का दर्जा प्राप्त होता है। यात्रा के दौरान इन्हें 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा घेरे में रखा जाता है। रूट को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है और एडवांस पायलट वाहन साथ चलता है। अवशेषों को स्मार्ट क्लाइमेट कंट्रोल, बुलेटप्रूफ और शॉक-प्रूफ केस में सुरक्षित रखा जाता है।

भारत-मंगोलिया सांस्कृतिक संबंध होंगे मजबूत

माना जा रहा है कि इस धार्मिक यात्रा से भारत और मंगोलिया के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही सांची में विदेशी पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

 

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